
भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री 4 नवंबर को काठमांडू पहुंच रहे हैं। वहीं, भारत के नए राजदूत सुधाकर दलेला 3 नवंबर को ही काठमांडू पहुंच जाएंगे और अपना कार्यभार संभालेंगे। दोनों के इस दौरे का मुख्य उद्देश्य नेपाली प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की भारत यात्रा से जुड़ी तैयारियों और कार्यक्रमों को अंतिम रूप देना है।
अगर सब कुछ तय योजना के मुताबिक रहा, तो शाह, जिन्हें ज्यादातर लोग अब भी ‘बालेन’ के नाम से जानते हैं, करीब 22 नवंबर को नई दिल्ली पहुंच सकते हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनकी पहली औपचारिक द्विपक्षीय भारत यात्रा होगी। उनकी सरकार को बने अभी करीब सात महीने ही हुए हैं। पिछले साल सितंबर में हुए बड़े Gen-Z प्रदर्शनों के बाद मार्च में केपी शर्मा ओली की सरकार के सत्ता से बाहर होने के बाद बालेन शाह ने कार्यभार संभाला था। इसके बाद से उनका ध्यान मुख्य रूप से देश की घरेलू समस्याओं और चुनौतियों पर रहा है।
शाह की पार्टी, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (Rastriya Swatantra Party), को चुनाव में मजबूत जनादेश मिला था। सत्ता संभालने के शुरुआती दिनों में ही उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि विदेश यात्राएं और राजदूतों के साथ बैठकें उनकी प्राथमिकता में नहीं हैं। यही वजह थी कि मई में विक्रम मिस्री का प्रस्तावित नेपाल दौरा नहीं हो पाया था। लेकिन अब परिस्थितियां बदलती नजर आ रही हैं। नेपाल के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि विक्रम मिस्री नेपाली पक्ष के साथ बैठक करेंगे और प्रधानमंत्री की भारत यात्रा के संभावित एजेंडे पर चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही बालेन्द्र शाह को भारत आने का निमंत्रण दे चुके हैं, इसलिए यात्रा की अधिकांश शुरुआती तैयारियां पहले से ही हो चुकी हैं।
इस यात्रा का समय भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दशैं, तिहार और छठ जैसे बड़े त्योहारों का मौसम समाप्त हो चुका है और अब दोनों देशों के पास बातचीत के लिए अपेक्षाकृत स्पष्ट कार्यक्रम है। इसी बीच नेपाल सरकार भोटे कोशी नदी में आई भीषण बाढ़ से हुए नुकसान से निपटने में भी जुटी हुई है। इस बाढ़ से कई परिवार प्रभावित हुए हैं और कुछ भारतीय नागरिक अब भी लापता हैं। ऐसे में विक्रम मिस्री की बातचीत में राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए भारत की संभावित सहायता का मुद्दा भी शामिल रहने की उम्मीद है।
दोनों देशों के संबंधों पर नजर रखने वाले जानकारों का मानना है कि यह यात्रा नई दिल्ली को काठमांडू की नई सरकार और उसकी टीम को बेहतर तरीके से समझने का अवसर भी देगी। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी अभी राष्ट्रीय स्तर पर अपेक्षाकृत नई पार्टी है। नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले और गृह मंत्री सुदन गुरुंग भारत के साथ बिजली, सड़क, व्यापार और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को लेकर अपनी बात अधिक खुलकर रख रहे हैं। जलविद्युत परियोजनाओं, बेहतर रेल और सड़क संपर्क, लोगों और सामानों की आवाजाही को आसान बनाने जैसे मुद्दे दोनों देशों के बीच पहले से चर्चा में रहे हैं। हालांकि, नई सरकार के आने से इन पुराने मुद्दों पर नए सिरे से काम शुरू होने की उम्मीद है।
विक्रम मिस्री के दौरे से ठीक एक दिन पहले नए भारतीय राजदूत सुधाकर दलेला का काठमांडू पहुंचना भी महत्वपूर्ण है। भारत और नेपाल के संबंधों में कई महत्वपूर्ण काम दूतावास के स्तर पर होते हैं। ऐसे में राजनयिक स्तर पर निरंतरता और बेहतर समन्वय बनाए रखना जरूरी माना जाता है।
हालांकि, प्रधानमंत्री की भारत यात्रा की तारीख अभी आधिकारिक रूप से तय नहीं हुई है। जब तक इसकी औपचारिक घोषणा नहीं होती, तब तक कार्यक्रम में बदलाव की संभावना बनी रहेगी। दोनों देशों में से किसी भी तरफ घरेलू परिस्थितियों के कारण कार्यक्रम आगे बढ़ सकता है। लेकिन विक्रम मिस्री का नेपाल दौरा और 22 नवंबर के आसपास प्रधानमंत्री की यात्रा को लेकर गंभीर चर्चा यह संकेत देती है कि दोनों देश पहले की हिचकिचाहट से आगे बढ़ चुके हैं।
सीमा पर रहने वाले आम लोगों के लिए भारत-नेपाल के संबंध केवल बड़े शिखर सम्मेलनों तक सीमित नहीं हैं। उनके लिए यह रिश्ता रोजगार, रेमिटेंस यानी विदेश से भेजी जाने वाली धनराशि, भारतीय अस्पतालों में इलाज और ट्रकों व बसों की रोजाना आवाजाही से जुड़ा है। उच्चस्तरीय यात्रा सुचारू रूप से संपन्न होने पर इन रोजमर्रा के संबंधों को भी मजबूती मिल सकती है। अगर बालेन शाह की भारत यात्रा से बिजली व्यापार में बढ़ोतरी, बाढ़ राहत को लेकर स्पष्ट सहयोग या बेहतर कनेक्टिविटी परियोजनाओं जैसे कुछ व्यावहारिक परिणाम निकलते हैं, तो इसका असर बैठक कक्षों से कहीं आगे तक दिखाई दे सकता है।
विक्रम मिस्री इससे पहले भी नेपाल का दौरा कर चुके हैं। पिछले साल भी वह नेपाल गए थे, जब वहां पिछली सरकार सत्ता में थी। लेकिन इस बार नेपाल का राजनीतिक परिदृश्य अलग है। नई सरकार ने शुरुआती महीनों में अपना ध्यान घरेलू चुनौतियों और दबावों पर केंद्रित रखा। अब ऐसा लग रहा है कि वह अपने दक्षिणी पड़ोसी भारत के साथ संबंधों को लेकर अधिक सक्रियता से आगे बढ़ने के लिए तैयार है। वहीं, भारत ने नेपाल के प्रधानमंत्री को दिया गया निमंत्रण बरकरार रखा और अब शेष तैयारियों को पूरा करने के लिए अपने शीर्ष राजनयिक को काठमांडू भेज रहा है।
प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की भारत यात्रा ठीक 22 नवंबर को होती है या कुछ दिन बाद, फिलहाल इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि दोनों देशों के बीच बातचीत की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। कई महीनों तक घरेलू मुद्दों पर ध्यान केंद्रित रखने के बाद नेपाल की नई सरकार अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना पहला बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है और भारत भी इस दिशा में उसके साथ आगे बढ़ रहा है।
स्रोत:
- द हिंदू (The Hindu), 29-30 अक्टूबर 2026
- द काठमांडू पोस्ट (The Kathmandu Post), 29 अक्टूबर 2026
- उपरोक्त रिपोर्टों में उद्धृत नेपाली और भारतीय राजनयिक सूत्र
@रोहित मनराल