
उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और महाराष्ट्र में विधान परिषद (MLC) चुनावों के नतीजे सामने आ चुके हैं। इन चुनावों में शिक्षकों और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की कुल 28 सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था। पिछले कुछ दिनों से जारी मतगणना की प्रक्रिया अब लगभग पूरी हो चुकी है। इस बार चुनाव में पेपर बैलेट का इस्तेमाल किया गया, जिसकी मांग विपक्ष की कुछ पार्टियां लगातार कर रही थीं।
कुल नतीजों की बात करें तो BJP और उसके NDA सहयोगियों ने 28 में से 16 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं, कांग्रेस चारों राज्यों में एक भी सीट नहीं जीत सकी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस नतीजे पर प्रतिक्रिया देते हुए पेपर बैलेट के इस्तेमाल का जिक्र किया और कांग्रेस को मिली सीटों की संख्या पर सवाल उठाया।
उत्तर प्रदेश: SP ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की, BJP को करीब छह सीटें
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों पर चुनाव हुआ था। यहां समाजवादी पार्टी (SP) ने पांच सीटों पर जीत हासिल कर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। इनमें वाराणसी की दोनों सीटें—शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र—शामिल हैं।
वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से SP के लाल बिहारी यादव और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से आशुतोष सिन्हा ने जीत दर्ज की। इसके अलावा आगरा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भी SP के आकाश अग्रवाल विजयी रहे।
दूसरी ओर, BJP ने राज्य में करीब छह सीटों पर जीत हासिल की। इनमें मेरठ-सहारनपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से दिनेश गोयल, मेरठ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से श्रीचंद शर्मा, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से हरि सिंह ढिल्लों और लखनऊ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से उमेश द्विवेदी शामिल हैं।
हरि सिंह ढिल्लों ने 17,000 से अधिक वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की, जबकि उमेश द्विवेदी ने लगातार तीसरी बार जीत हासिल कर हैट्रिक लगाई। गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भी मुकाबला काफी करीबी रहा, लेकिन BJP के ध्रुव त्रिपाठी जीतने में सफल रहे।
उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले इन नतीजों को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। SP की वाराणसी में दोनों सीटों पर जीत पार्टी के लिए अहम है, वहीं BJP भी अपने प्रदर्शन के आधार पर चुनावी समीकरणों का आकलन करेगी।
कर्नाटक: कांग्रेस चारों सीटों पर हारी, BJP-JD(S) गठबंधन को जीत
कर्नाटक में विधान परिषद चुनाव के नतीजे कांग्रेस के लिए निराशाजनक रहे। राज्य की चारों सीटों पर कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा।
BJP ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की। इनमें उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से शशिल जी. नामोशी, पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से एस.वी. संकनूर और दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से के.एम. सुरेश शामिल हैं।
वहीं, BJP की सहयोगी जनता दल (सेक्युलर) यानी JD(S) ने बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीट अपने नाम की। यहां ए.पी. रंगनाथ ने कांग्रेस के मौजूदा MLC को हराया।
इस तरह कर्नाटक की चारों सीटें BJP और JD(S) गठबंधन के खाते में गईं। राज्य में BJP नेताओं ने इन नतीजों को कांग्रेस सरकार के कामकाज, भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों और अधूरे वादों के प्रति नाराजगी से जोड़कर देखा। हालांकि, ये राजनीतिक दलों की अपनी व्याख्याएं हैं।
कर्नाटक में कांग्रेस के लिए यह परिणाम इसलिए भी अहम है क्योंकि पार्टी राज्य में सत्ता में है, लेकिन शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में उसे किसी सीट पर जीत नहीं मिली।
बिहार: BJP को तीन सीटें, जन सुराज पार्टी ने खोला खाता
बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों के नतीजों में मुकाबला अपेक्षाकृत बंटा हुआ दिखाई दिया। BJP ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की, जिनमें तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र भी शामिल है।
जनता दल (यूनाइटेड) यानी JD(U) को एक सीट मिली, जबकि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने भी एक सीट पर जीत हासिल की। पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से RJD के डॉ. संजीव सिंह विजयी रहे।
इस चुनाव में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने भी अपना खाता खोला। दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी के डॉ. सुरेश राय ने जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस के मौजूदा MLC को कुछ सौ वोटों के अंतर से हराया।
इसके अलावा दो निर्दलीय उम्मीदवार भी जीतने में सफल रहे, जिनमें सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का विजेता भी शामिल है।
बिहार में इन नतीजों के दौरान कई मौजूदा MLC को भी अपनी सीट गंवानी पड़ी। इससे राज्य में शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के भीतर बदलते स्थानीय राजनीतिक समीकरणों की झलक मिली।
महाराष्ट्र: महायुति और MVA के बीच मुकाबला, नागपुर सीट पर देर रात तक मतगणना
महाराष्ट्र में विधान परिषद की पांच सीटों पर हुए चुनाव में मुकाबला काफी करीबी रहा। उपलब्ध नतीजों के अनुसार, सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन और विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) ने दो-दो सीटों पर जीत दर्ज की।
BJP के कौस्तुभ गावड़े ने पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की, जबकि शिवसेना के किरण सरनाईक अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीट बचाने में सफल रहे।
विपक्ष की ओर से NCP (शरदचंद्र पवार) के उम्मीदवारों ने दो स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में जीत दर्ज की। हर्षदा देशमुख-जाधव ने पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और प्रतापसिंह पाटिल ने औरंगाबाद स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की। प्रतापसिंह पाटिल ने तीन बार से MLC रहे मौजूदा प्रतिनिधि को हराया।
वहीं, नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतगणना काफी देर तक जारी रही। यहां BJP के सुधाकर कोहले और कांग्रेस के मौजूदा MLC अभिजीत वंजारी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। दोनों उम्मीदवारों के बीच लंबे समय तक बढ़त बदलती रही और कुछ स्थानों पर मतगणना 40 घंटे से भी अधिक समय तक चली।
कांग्रेस की ओर से इस सीट पर जीत का दावा किया गया, लेकिन शुरुआती प्रमुख रिपोर्टों के समय तक आधिकारिक घोषणा नहीं हुई थी।
महाराष्ट्र में महायुति के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर मतभेदों की खबरें भी सामने आईं। राजनीतिक विश्लेषण के अनुसार, गठबंधन के अंदर तालमेल की कमी ने विपक्षी उम्मीदवारों के लिए कुछ सीटों पर अवसर पैदा किए।
पांच मौजूदा MLC हारे, निर्दलीय और नए दलों ने भी दिखाई ताकत
चारों राज्यों के नतीजों में कुल पांच मौजूदा MLC को हार का सामना करना पड़ा। इसके अलावा निर्दलीय उम्मीदवारों और जन सुराज जैसे नए राजनीतिक दलों ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
मतदान के दिन कुल मिलाकर ठीक-ठाक मतदान हुआ था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की तुलना में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत अधिक रहा।
इन चुनावों को विधानसभा चुनावों के समान नहीं माना जा सकता, लेकिन इनके नतीजे शिक्षकों, स्नातकों और स्थानीय मतदाता समूहों के राजनीतिक रुझानों को समझने का एक संकेत जरूर देते हैं।
उत्तर प्रदेश में SP की वाराणसी की दोनों सीटों पर जीत पार्टी को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संदेश देने का अवसर देगी। कर्नाटक में BJP-JD(S) गठबंधन चारों सीटों पर जीत को कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनमत के रूप में पेश कर सकता है। बिहार में परिणामों ने विभिन्न दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच बंटे हुए समर्थन को दिखाया, जबकि महाराष्ट्र में गठबंधन के भीतर तालमेल का मुद्दा चर्चा में रहा।
कुल मिलाकर, इन चुनावों में राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दों के साथ-साथ स्थानीय समीकरणों की भी अहम भूमिका रही। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवारों के व्यक्तिगत संपर्क, स्थानीय नेटवर्क और मतदाताओं के साथ उनके संबंध अक्सर चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं।
स्रोत: ABP Live/PTI रिपोर्ट (28 अक्टूबर 2026), Economic Times (29 अक्टूबर 2026), Times of India—महाराष्ट्र कवरेज (29 अक्टूबर 2026), India Today (28 अक्टूबर 2026), Hindustan Times लाइव अपडेट (28 अक्टूबर 2026), TV9 हिंदी (28–29 अक्टूबर 2026)।
@रोहित मनराल