
पिछले कई दिनों से पूरा देश जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र प्रदर्शन को देख रहा है। छात्र पेपर लीक, खासकर NEET परीक्षा में हुई गड़बड़ियों को लेकर बेहद नाराज़ हैं, जिसने लाखों युवाओं के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। माहौल लगातार तनावपूर्ण बना रहा, पुलिस ने भी सख्ती दिखाई और इसी बीच कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगे।
इनमें से एक वीडियो में नोएडा की एक युवती रुचिका सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करती हुई दिखाई दी। वीडियो देखते ही देखते पूरे देश में फैल गया। कुछ ही समय में पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। इसके बाद लोग दो हिस्सों में बंट गए। कुछ लोगों का कहना था कि यह सीधा-सीधा प्रधानमंत्री का अपमान है और कानून को अपना काम करना चाहिए। वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों का मानना था कि ये गुस्से और निराशा में प्रतिक्रिया दे रहे छात्र हैं, इसलिए हर नाराज़गी को आपराधिक मामला नहीं बनाया जाना चाहिए।
इसी बीच आज शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक छोटा-सा वीडियो संदेश जारी किया।
उन्होंने न तो गुस्सा जताया और न ही किसी तरह की नाराज़गी दिखाई। बेहद शांत स्वर में उन्होंने कहा, “गालियां कभी किसी समस्या का समाधान नहीं होतीं। भटके हुए लोगों को सही रास्ता दिखाइए। आइए, मिलकर काम करें। आइए, भारत के लिए काम करें।”
इसके बाद उन्होंने कहा कि वह उन छात्रों को माफ करते हैं। वह नहीं चाहते कि उन्हें कानूनी मामलों में उलझाया जाए। उनकी इच्छा है कि उन छात्रों को समझाया जाए, उनका मार्गदर्शन किया जाए और उन्हें देश निर्माण की सकारात्मक प्रक्रिया से जोड़ा जाए। यही उनके संदेश का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था।

आमतौर पर ऐसे मामलों में जब कोई बड़ा नेता इस तरह की अभद्र भाषा का सामना करता है तो या तो चुप्पी देखने को मिलती है या फिर सख्त कार्रवाई की बात कही जाती है। लेकिन इस बार मामला कुछ अलग दिखाई दिया। ऐसा लगा मानो प्रधानमंत्री किसी आधिकारिक बयान की बजाय सीधे उन युवाओं से बात कर रहे हों। पिछले एक सप्ताह से वह लगातार युवाओं के नाम छोटे-छोटे वीडियो संदेश जारी कर रहे हैं। पहले पेपर लीक को लेकर देर रात संदेश दिया, फिर लोगों से मिले सुझावों के लिए धन्यवाद कहा और अब इस वीडियो के जरिए उन्होंने एक कदम और आगे बढ़ते हुए छात्रों को माफ करने की बात कही।
हालांकि हर कोई इस संदेश को एक ही नजरिए से नहीं देख रहा। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों का कहना है कि यह एक राजनीतिक रणनीति हो सकती है, क्योंकि पेपर लीक, पुलिस कार्रवाई और जवाबदेही जैसे बड़े मुद्दे अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। शिक्षा मंत्री पहले ही दबाव के बीच इस्तीफा दे चुके हैं, लेकिन छात्रों का आंदोलन अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। वहीं दूसरी ओर कई लोग प्रधानमंत्री के इस रुख की सराहना कर रहे हैं। उनका कहना है कि केवल एक आत्मविश्वासी नेता ही अपने और अपनी दिवंगत मां के खिलाफ कही गई आपत्तिजनक बातों को नजरअंदाज करते हुए युवाओं को सजा देने की बजाय उन्हें सही रास्ता दिखाने की बात कर सकता है।
अगर उन छात्रों के माता-पिता की स्थिति के बारे में सोचा जाए तो यह अलग ही तस्वीर सामने आती है। कल्पना कीजिए कि आपका बच्चा प्रदर्शन में शामिल हो, किसी ने उसके गुस्से का एक वीडियो रिकॉर्ड कर लिया हो और अचानक पूरे देश में उसके खिलाफ FIR और कानूनी कार्रवाई की चर्चा होने लगे। ऐसे समय में जिस व्यक्ति के खिलाफ वह वीडियो बनाया गया था, वही सामने आकर कहे कि उन्हें छोड़ दीजिए, उन्हें सिर्फ सही दिशा दिखाइए। निश्चित रूप से यह बात अलग महसूस होती है, भले ही मूल समस्याएं अभी भी बनी हुई हों।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में किसी का नाम नहीं लिया। उन्होंने वायरल वीडियो या उससे जुड़े विवाद की विस्तार से चर्चा भी नहीं की। उन्होंने केवल इतना कहा कि इस तरह की अभद्र भाषा को व्यक्तिगत हमला मानने की बजाय युवाओं की निराशा के रूप में देखा जाना चाहिए। ऐसे दौर में जब सोशल मीडिया सबसे ज्यादा गुस्से और आक्रामकता को बढ़ावा देता है, प्रधानमंत्री का यह संदेश अलग नजर आता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बयान के बाद जमीन पर भी कुछ बदलेगा? क्या छात्रों के खिलाफ दर्ज मामले वास्तव में वापस लिए जाएंगे? क्या छात्रों से बातचीत होगी या फिर सख्ती का दौर जारी रहेगा? और सबसे अहम, क्या पेपर लीक जैसी समस्या का स्थायी समाधान निकलेगा? इन सभी सवालों के जवाब आने वाले समय में मिलेंगे। फिलहाल प्रधानमंत्री का संदेश साफ है— गालियां किसी समस्या का समाधान नहीं हैं, भटके हुए लोगों को सही रास्ता दिखाइए और मिलकर देश के लिए काम कीजिए।
कहने में यह बात बहुत सरल लगती है, लेकिन इसे अमल में लाना कहीं अधिक कठिन है। फिर भी, कम से कम देश के सर्वोच्च नेतृत्व की ओर से यह बात आज खुलकर कही गई।
स्रोत:
- 31 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा X पर साझा किया गया वीडियो संदेश।
- WION, ET Now और अन्य समाचार चैनलों द्वारा साझा की गई रिपोर्टें।
- जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन, पेपर लीक आंदोलन और रुचिका सिंह के खिलाफ दर्ज FIR से संबंधित NDTV, The Hindu, The Indian Express तथा पुलिस के आधिकारिक बयानों पर आधारित रिपोर्टें।
@रोहित मनराल