
नैरोबी: इस सप्ताह भारत और केन्या के कुछ पत्रकार एक मेज पर बैठे और एक ऐसे विषय पर चर्चा की, जिस पर आमतौर पर खुलकर बात नहीं होती—दोनों देशों के पत्रकार एक-दूसरे के देश की कहानियों को बेहतर तरीके से दुनिया के सामने कैसे प्रस्तुत कर सकते हैं।
न्यूजपेपर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NAI) के महासचिव और इंटरनेशनल काउंसिल फॉर जर्नलिस्ट्स (ICJ) के ग्लोबल प्रेसिडेंट डॉ. विपिन गौर ने केन्या की एसोसिएशन ऑफ फ्रीलांस जर्नलिस्ट्स (AFJ) के प्रमुख पदाधिकारियों से मुलाकात की। केन्या की ओर से AFJ की अध्यक्ष विनी कामाऊ ने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। उनके साथ उपाध्यक्ष हेनरी ओविनो और उप सचिव रूथ आयुगी भी मौजूद रहीं। बैठक में बड़े-बड़े दावों के बजाय शुरुआत से ही व्यावहारिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
बैठक के दौरान एक संभावित समझौता ज्ञापन (MoU) पर चर्चा हुई। इसके साथ ही इंडो-केन्या फ्रेंडशिप जर्नलिस्ट्स फोरम बनाने का विचार भी सामने आया। इस मंच का उद्देश्य दोनों देशों के पत्रकारों को आपस में जुड़ने, अनुभव साझा करने और संयुक्त रूप से खबरों पर काम करने का अवसर प्रदान करना होगा। भारतीय और केन्याई पत्रकारों को एक-दूसरे के न्यूजरूम में काम करने और अनुभव प्राप्त करने का अवसर देने के लिए एक एक्सचेंज प्रोग्राम पर भी चर्चा की गई।
डॉ. गौर ने केन्या के अधिक पत्रकारों को 12 से 14 फरवरी 2027 तक प्रस्तावित ग्लोबल फेस्टिवल ऑफ जर्नलिज्म में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। वहीं, AFJ ने नवंबर 2027 में आयोजित होने वाले अपने फ्रीलांस जर्नलिस्ट्स कॉन्फ्रेंस और नवंबर 2026 में होने वाली ACOS Alliance की बैठक का उल्लेख किया।
डॉ. गौर ने भारत और केन्या के बीच मीडिया सहयोग को लेकर अपना दृष्टिकोण स्पष्ट किया।
उन्होंने कहा, “पत्रकारिता केवल समाचार रिपोर्ट करने तक सीमित नहीं है; यह लोगों, संस्कृतियों और देशों को जोड़ने वाला एक शक्तिशाली सेतु है। भारत और केन्या के बीच लंबे समय से मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। इस साझेदारी के माध्यम से हमारा उद्देश्य पत्रकारों के लिए एक-दूसरे से जुड़ने, सीखने और एक-दूसरे की कहानियों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने के सार्थक अवसर तैयार करना है।”
उन्होंने बैठक के अनुभव पर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
डॉ. गौर ने कहा, “विनी कामाऊ, हेनरी ओविनो और रूथ आयुगी से मिलकर मुझे बहुत खुशी हुई। उन्होंने जिस गर्मजोशी, सम्मान और प्रोत्साहन के साथ मेरा स्वागत किया, उससे मुझे और अधिक ऊर्जा तथा प्रेरणा मिली।”
व्यावहारिक स्तर पर, टॉक अफ्रीका (Talk Africa) और NAI न्यूज (NAI News) के बीच खबरों के आदान-प्रदान पर भी चर्चा हुई, ताकि एक देश की खबरें दूसरे देश के पाठकों तक अधिक आसानी से पहुंच सकें। AFJ के सदस्यों के लिए प्रेस कार्ड उपलब्ध कराने और फ्रीलांस पत्रकारों के पेशेवर नेटवर्क को मजबूत करने जैसे मुद्दे भी चर्चा का हिस्सा रहे।
डॉ. गौर ने विनी कामाऊ का नैरोबी स्थित भारतीय उच्चायोग से परिचय कराने की पेशकश की, ताकि AFJ को मीडिया से जुड़े कार्यक्रमों और गतिविधियों की जानकारी मिलती रहे। वहीं, AFJ ने केन्या की मीडिया काउंसिल (Media Council of Kenya) से संपर्क स्थापित कराने में सहायता देने की पेशकश की। इंटरनेशनल काउंसिल फॉर जर्नलिस्ट्स की ओर से बिनिश थॉमस ने भी इस बातचीत का स्वागत किया और इस पहल को समर्थन देने की बात कही।
भारत और केन्या के मजबूत संबंधों को मिलेगा नया आयाम
भारत और केन्या के बीच संबंध पहले से ही मजबूत हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 3.5 अरब डॉलर का है। भारतीय कंपनियां केन्या में हजारों लोगों को रोजगार देती हैं। उच्चस्तरीय यात्राओं ने भी दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 में केन्या का दौरा किया था, जबकि केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो 2023 में भारत आए थे।
भारत के भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (ITEC) कार्यक्रम के तहत केन्या के हजारों पेशेवर भारत में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। पिछले एक वर्ष के दौरान नैरोबी स्थित भारतीय उच्चायोग ने भी केन्या के मीडिया संस्थानों के साथ संवाद बढ़ाया है। इनमें स्टैंडर्ड ग्रुप (Standard Group) और केन्या ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (Kenya Broadcasting Corporation) जैसे संस्थान शामिल हैं। इन चर्चाओं में सामग्री के आदान-प्रदान और प्रशिक्षण जैसे विषयों पर ध्यान दिया गया है।
केन्या के फ्रीलांस पत्रकारों के लिए इस संभावित साझेदारी के कई फायदे हो सकते हैं। उन्हें अधिक व्यापक पहचान, प्रशिक्षण के अवसर और अपनी खबरों को भारतीय मीडिया तक पहुंचाने का मंच मिल सकता है। वहीं, भारतीय पत्रकारों को पूर्वी अफ्रीका की घटनाओं और परिस्थितियों को वहां के स्थानीय पत्रकारों के अनुभवों के माध्यम से समझने और रिपोर्ट करने का अवसर मिलेगा।
दोनों देशों के लिए यह पहल सरकार और व्यापार के स्तर पर पहले से मौजूद संबंधों में एक नया आयाम जोड़ सकती है।
साझेदारी के सामने चुनौतियां भी मौजूद
हालांकि, अभी तक किसी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हुए हैं। प्रस्तावित MoU इस पहल को औपचारिक ढांचा प्रदान कर सकता है। फ्रेंडशिप फोरम की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह नियमित रूप से बैठकें आयोजित करे और पत्रकारों के लिए वास्तविक अवसर तैयार करे।
इसी तरह, पत्रकारों के आदान-प्रदान के कार्यक्रमों के लिए वित्तीय संसाधनों और सावधानीपूर्वक योजना की आवश्यकता होगी, ताकि इनका लाभ केवल वरिष्ठ पदाधिकारियों तक सीमित न रहे, बल्कि काम कर रहे पत्रकारों को भी मिल सके। खबरों का आदान-प्रदान भी तभी सफल होगा, जब सामग्री पाठकों के लिए प्रासंगिक हो और पत्रकारिता के पेशेवर मानकों का पालन किया जाए।
इसके बावजूद, बैठक में शामिल प्रतिनिधियों को लगा कि यह बातचीत आगे बढ़ने की दिशा में एक सार्थक कदम है। मीडिया की दुनिया में, जहां कई बार देशों के बीच दूरियां अधिक दिखाई देती हैं, वहीं खबरें लिखने और लोगों तक पहुंचाने वाले पत्रकारों को एक-दूसरे के करीब लाने का यह प्रयास महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
स्रोत: 23 अक्टूबर 2026 को NAI और AFJ की बैठक पर कंट्री एंड पॉलिटिक्स की रिपोर्ट; नैरोबी स्थित भारतीय उच्चायोग के सार्वजनिक बयान; भारत–केन्या व्यापार और उच्चस्तरीय यात्राओं से संबंधित उपलब्ध रिकॉर्ड; तथा ITEC कार्यक्रम के आंकड़े।
@रोहित मनराल