
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि भारत के साथ व्यापार समझौता लगभग फाइनल होने के करीब है। उन्होंने कहा, “वे समझौता करना चाहते हैं। हम समझौता करेंगे। हां, हम इसके काफी करीब हैं।” इसके बाद उन्होंने यह भी कहा कि यह समझौता अमेरिका द्वारा पहले किए गए व्यापार समझौतों से “काफी अलग तरह का समझौता” हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस समझौते में ऐसा क्या अलग होगा। उन्होंने इस सवाल को अनुत्तरित छोड़ दिया।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत के दौरे पर हैं। वह मंगलवार को मुंबई पहुंचे और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बैठक की। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और रक्षा सहित कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक के बाद भारतीय पक्ष की ओर से जारी एक संक्षिप्त बयान में कहा गया कि दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में हुई प्रगति का स्वागत किया और इसे जल्द पूरा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
रुबियो भी इस समझौते को लेकर काफी सकारात्मक नजर आ रहे हैं। वह लगातार कह रहे हैं कि दोनों देश समझौते के “बहुत, बहुत करीब” हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि समझौते से जुड़े 99 प्रतिशत काम पूरे हो चुके हैं और अब मुख्य रूप से तकनीकी भाषा तथा अन्य बारीकियों को अंतिम रूप देना बाकी है। उन्होंने कहा, “हमें महीनों नहीं, बल्कि कुछ हफ्तों का समय लगेगा।” रुबियो ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी विदेश विभाग व्यापार समझौतों पर सीधे बातचीत नहीं करता, क्योंकि यह जिम्मेदारी अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि की होती है। हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं के कारण वह इस प्रक्रिया पर करीबी नजर रख रहे हैं।
रुबियो भारत से अमेरिकी ऊर्जा और प्रौद्योगिकी की खरीद बढ़ाने पर भी जोर दे रहे हैं। दोनों देशों के बीच आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का बड़ा लक्ष्य भी सामने है, जिसमें ऊर्जा क्षेत्र की अहम भूमिका मानी जा रही है। रुबियो का रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी का दौरा भी प्रस्तावित है, जो इस समय दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग के महत्व को दर्शाता है।
हालांकि, इस समझौते तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं रहा है। टैरिफ लंबे समय से दोनों देशों के बीच विवाद का प्रमुख कारण रहे हैं। इसके अलावा, भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भी अमेरिका की ओर से भारी दंडात्मक शुल्क लगाए जाने की आशंका पैदा हुई थी। हाल ही में ट्रंप ने प्रस्तावित कुछ अतिरिक्त टैरिफ से राहत दी, जिससे दोनों देशों के बीच बातचीत का माहौल बेहतर होने में मदद मिली है। रुबियो ने कहा कि इन फैसलों का उद्देश्य भारत को दंडित करना नहीं था और दोनों देशों के रिश्तों को सावधानीपूर्वक संभालना जरूरी है।
व्यापार समझौते पर बातचीत पिछले डेढ़ साल से भी अधिक समय से चल रही है। इससे पहले एक रूपरेखा तैयार की गई थी, लेकिन अंतिम चरण में कई मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई। इनमें कृषि उत्पाद, बाजार तक पहुंच और ऊर्जा से जुड़े सवाल प्रमुख रहे हैं। भारतीय अधिकारियों ने पहले भी संकेत दिया था कि बातचीत एक ऐसे पड़ाव पर पहुंच गई थी, जहां दोनों पक्ष आगे और रियायतें देने के लिए तैयार नहीं थे। इसके बावजूद, दोनों देश लगातार यह कहते रहे हैं कि बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है।
यदि यह समझौता वास्तव में अंतिम रूप ले लेता है, तो इससे दोनों देशों के बीच टैरिफ कम हो सकते हैं और कारोबारियों को व्यापार के लिए अधिक स्पष्टता मिल सकती है। भारतीय निर्यातक बेहतर व्यापारिक शर्तों की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि उन्हें कुछ प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले अधिक लाभ मिल सके। वहीं, अमेरिका की दिलचस्पी भारत में ऊर्जा उत्पादों, रक्षा उपकरणों और प्रौद्योगिकी की बिक्री बढ़ाने में है। ट्रंप के “अलग तरह के समझौते” वाले बयान ने इस संभावना को लेकर भी चर्चा बढ़ा दी है कि यह डील सामान्य टैरिफ कटौती से आगे जा सकती है।
हालांकि, अभी तक इस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हुए हैं। रुबियो ने इस बात पर जोर दिया कि जब तक हर छोटी-बड़ी बात को अंतिम रूप नहीं दे दिया जाता, तब तक ऐसे समझौतों की आधिकारिक घोषणा नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों देशों के रिश्ते इतने महत्वपूर्ण हैं कि किसी भी तरह की जल्दबाजी से सार्वजनिक स्तर पर भ्रम या विवाद पैदा होने का जोखिम नहीं उठाया जा सकता।
फिलहाल, ट्रंप के यह कहने कि समझौता लगभग तैयार है और रुबियो के इसे कुछ हफ्तों में पूरा होने की उम्मीद जताने से दोनों देशों के बीच सकारात्मक माहौल दिखाई दे रहा है। पिछले कुछ समय की तुलना में अब बातचीत को लेकर उम्मीदें अधिक मजबूत नजर आ रही हैं।
अब यह इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतिम तकनीकी मुद्दों को कितनी जल्दी सुलझाया जाता है। इससे तय होगा कि दोनों देशों के बीच बनी यह उम्मीद वास्तविक व्यापार समझौते में बदलती है या नहीं, जिस पर दोनों देशों के नेता अपने हस्ताक्षर कर सकें। फिलहाल, दोनों पक्षों का संदेश स्पष्ट है—वे समझौते के करीब हैं, इसे जल्द पूरा करना चाहते हैं और यह समझौता पारंपरिक व्यापार समझौतों से कुछ अलग हो सकता है।
स्रोत: ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप की टिप्पणियां; मुंबई में रुबियो के बयान और द इंडियन एक्सप्रेस तथा नेटवर्क18 को दिए गए इंटरव्यू; जयशंकर-रुबियो बैठक के बाद विदेश मंत्रालय का बयान; हिंदुस्तान टाइम्स, इंडियन एक्सप्रेस, लाइवमिंट, बिजनेस टुडे और इंडिया टुडे की रिपोर्ट।
@Rohit Manral