
गुलजार सिंह एक साधारण दिहाड़ी मजदूर थे, जिनकी उम्र करीब 47 साल बताई जा रही है। उनका बेटा चिट्टा की गिरफ्त में आ गया था—वही खतरनाक ड्रग, जिसकी समस्या इन दिनों पंजाब में लगातार सामने आती रही है। नशे की लत इतनी बढ़ गई थी कि परिवार को अपना घर तक बेचना पड़ा।
6 सितंबर को वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा एक सार्वजनिक बैठक के लिए उनके गांव पहुंचे थे। गुलजार खड़े हुए और उन्होंने वही सवाल पूछा जो लंबे समय से उन्हें अंदर से परेशान कर रहा था—
“मंत्री साहब, चिट्टा इतनी खुलेआम क्यों बिक रहा है? मेरा बेटा बर्बाद हो गया, सरकार इसे रोक क्यों नहीं पाई?”
बस, गुलजार ने इतना ही पूछा था।
परिवार के मुताबिक, बैठक के बाद कुछ स्थानीय लोगों, जिनमें पंचायत सदस्य भी शामिल थे, ने उन पर दबाव बनाना शुरू किया। उनसे माफी मांगने और अपनी कही बात वापस लेने के लिए कहा गया।
अगले दिन गुलजार ने जहर खा लिया।
उन्हें एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल ले जाया गया। पहले संगरूर, फिर पटियाला, उसके बाद वापस दूसरे अस्पताल और फिर एक निजी अस्पताल में इलाज कराया गया। आखिरकार उन्हें डीएमसी लुधियाना ले जाया गया। 7 सितंबर की रात उनकी मौत हो गई।
मौत से पहले बनाए गए एक वीडियो में उन्होंने कथित तौर पर मंत्री और कुछ स्थानीय नेताओं के नाम लिए और कहा कि उन्हें इस स्थिति तक पहुंचाने के लिए उन पर दबाव बनाया गया।
पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिसमें सरपंच और कुछ अन्य लोग शामिल हैं। उन पर आत्महत्या के लिए उकसाने और एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है, क्योंकि गुलजार दलित समुदाय से थे। हालांकि, एफआईआर में अभी मंत्री का नाम शामिल नहीं है। मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने भी पंजाब सरकार से इस पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
राहुल गांधी ने पंजाब सरकार पर लगाया गंभीर आरोप
बुधवार सुबह राहुल गांधी ने इस मामले को लेकर एक कड़ा पोस्ट किया। उन्होंने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में एक खतरनाक पैटर्न सामने आ रहा है—अगर कोई सरकार की नाकामियों पर सवाल पूछता है, तो उसे धमकी और प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है।
राहुल गांधी ने कहा कि गुलजार एक दलित व्यक्ति थे, जिन्होंने अपनी आंखों के सामने अपने बेटे को नशे में बर्बाद होते देखा। उन्होंने सिर्फ वित्त मंत्री से यह पूछा था कि सरकार ड्रग्स के कारोबार को रोकने में इतनी नाकाम क्यों रही।
राहुल गांधी के मुताबिक, इस सवाल के बाद गुलजार को कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया, अपमानित किया गया और माफी मांगने के लिए इतना दबाव बनाया गया कि उन्होंने जहर खा लिया। इसके बाद उन्हें एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल ले जाया गया और आखिरकार उनकी मौत हो गई।
राहुल गांधी ने कहा—
“सरकार का काम जनता को जवाब देना है, सवाल पूछने वालों को कुचलना नहीं।”
उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान से तुरंत वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का इस्तीफा मांगने और मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने यह भी मांग की कि एफआईआर में मंत्री का नाम शामिल किया जाए।
राहुल गांधी ने एक और युवक मोहंजीत सिंह का भी जिक्र किया, जिसे कथित तौर पर पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए प्रताड़ित किया गया था।
विपक्ष ने भी सरकार पर बढ़ाया दबाव
इस मामले को लेकर विपक्ष ने पंजाब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
बीजेपी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, दोनों के इस्तीफे की मांग की है और मामले की सीबीआई जांच की मांग भी उठाई है।
अकाली दल के नेताओं का कहना है कि गुलजार का मृत्यु पूर्व बयान नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
वहीं पंजाब कांग्रेस के नेताओं ने इस घटना को सरकार का शर्मनाक चेहरा बताया है।
AAP ने आरोपों को बताया “गिद्ध राजनीति”
दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी ने विपक्ष के आरोपों को “वल्चर पॉलिटिक्स” यानी “गिद्ध राजनीति” बताया है।
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का कहना है कि उन्होंने गुलजार की बात को ठीक से सुना था और पुलिस को ड्रग्स सप्लाई करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए भी कहा था।
स्थानीय पंचायत से जुड़े लोगों ने भी गुलजार को परेशान या प्रताड़ित करने के आरोपों से इनकार किया है।
पंजाब में ड्रग्स का सवाल फिर सामने
लेकिन इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है।
पंजाब लंबे समय से ड्रग्स की समस्या से जूझ रहा है। सरकारें आती-जाती रही हैं, बड़े-बड़े अभियान चलाए जाते रहे हैं, लेकिन आज भी कई परिवार नशे के कारण बर्बाद हो रहे हैं।
गुलजार सिंह ने भी एक सार्वजनिक बैठक में यही सवाल पूछा था—आखिर ड्रग्स का कारोबार क्यों नहीं रुक रहा है?
और जब सवाल पूछने वाले व्यक्ति की मौत हो जाती है, तो यह मामला सिर्फ एक और खबर बनकर नहीं रह जाता।
राहुल गांधी ने इसे उन लोगों को कुचलने का मामला बताया है जो सरकार से सवाल पूछते हैं। राजनीति पर सहमति या असहमति हो सकती है, लेकिन मांग सीधी है—मामले की निष्पक्ष जांच हो, परिवार को न्याय मिले और अगर लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं तो जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय हो।
गुलजार सिंह का परिवार अब गहरे दुख में है। उनके पास सिर्फ अपने खोए हुए सदस्य की यादें हैं और यह उम्मीद कि उनकी आवाज आखिरकार सुनी जाएगी।
और पंजाब के सामने वही सवाल आज भी खड़ा है—
आखिर ड्रग्स का कारोबार क्यों नहीं रोका जा रहा है?
Sources: Times of India, Indian Express, NDTV, The Tribune, India Today, ANI, The Hindu.
@रोहित मनराल