प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक सत्यापित (Verified) फेसबुक अकाउंट से एक वीडियो कुछ समय के लिए गायब हो जाता है, सरकार दखल देती है और फिर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म चलाने वाली कंपनी Meta यह दिखाने में जुट जाती है कि वह इस मामले को गंभीरता से ले रही है। फिलहाल स्थिति कुछ ऐसी ही है।

बुधवार को Meta ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को भरोसा दिलाया कि अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य प्रमुख भारतीय खातों (High-Profile Accounts) की पोस्ट पर अतिरिक्त निगरानी रखी जाएगी। ऐसी पोस्ट की समीक्षा कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर होगी। साथ ही कई अतिरिक्त जांच प्रक्रियाएं लागू की जाएंगी ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो। मामले से जुड़े सूत्रों ने PTI को यह जानकारी दी है और कई मीडिया रिपोर्टों में भी यही बात सामने आई है।
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब एक दिन पहले आईटी मंत्रालय ने Meta के ग्लोबल हेड ऑफ पब्लिक पॉलिसी को तलब किया था। इसकी वजह प्रधानमंत्री मोदी का एक छोटा वीडियो था। यह युवाओं को संबोधित उनका पहला सेल्फी-स्टाइल वीडियो था, जिसमें उन्होंने पेपर लीक से छात्रों और उनके परिवारों को होने वाली परेशानी का जिक्र किया था। साथ ही सरकार की ओर से सख्त कानून, फास्ट-ट्रैक कोर्ट और कड़ी सजा लाने की योजना के बारे में भी बताया था।
यह वीडियो सबसे पहले 23 जुलाई के आसपास इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया गया था और बाद में फेसबुक पर भी साझा किया गया। हालांकि 28 जुलाई की सुबह कुछ समय के लिए फेसबुक पर इस वीडियो की पहुंच (Access) सीमित हो गई। बाद में Meta ने वीडियो को बहाल करते हुए कहा कि यह कार्रवाई “गलती से” हुई थी।
कंपनी ने इस पूरी घटना के लिए अपने स्वचालित (Automated) कंटेंट फ़िल्टर सिस्टम में आई तकनीकी गड़बड़ी को जिम्मेदार ठहराया है। Meta के अनुसार, उसके AI आधारित सिस्टम इस पोस्ट के साझा किए गए संस्करणों (Shared Versions) और उससे जुड़े अन्य कंटेंट की समीक्षा कर रहे थे। इसी प्रक्रिया के दौरान मूल पोस्ट भी गलती से उस जांच की जद में आ गई और कुछ समय के लिए प्रतिबंधित हो गई। Meta ने इस गलती के लिए माफी भी मांगी है। कंपनी के आधिकारिक बयान में कहा गया कि पोस्ट को गलती से हटाया गया था और अब उसे दोबारा बहाल कर दिया गया है।

हालांकि सरकार Meta के इस स्पष्टीकरण से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। आईटी सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि Meta द्वारा अपनी गलती स्वीकार करना और माफी मांगना सकारात्मक कदम है, लेकिन कंपनी की ओर से दिया गया कारण पर्याप्त नहीं है। अधिकारियों ने Meta की सफाई को “उचित नहीं” बताया और स्पष्ट किया कि मामला अभी समाप्त नहीं हुआ है। सरकार इस बात पर विस्तृत चर्चा चाहती है कि आखिर प्रधानमंत्री के सत्यापित अकाउंट की पोस्ट भी इस तरह की गलती का शिकार कैसे हो सकती है। यदि स्वचालित सिस्टम इस तरह की त्रुटि कर सकते हैं, तो कंपनी को अपने तकनीकी तंत्र में सुधार करना होगा।
Meta ने अब मंत्रालय को एक विस्तृत पत्र भेजकर नए सुरक्षा उपायों की जानकारी दी है। इसके तहत प्रधानमंत्री और अन्य प्रमुख खातों की पोस्ट पर अतिरिक्त स्तर की निगरानी रखी जाएगी। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कई चरणों में समीक्षा की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, इसका उद्देश्य हाई-प्रोफाइल अकाउंट्स को इस तरह सुरक्षित करना है कि स्वचालित सिस्टम उनकी पोस्ट को बिना उचित जांच के हटाने या सीमित करने जैसी कार्रवाई न कर सकें। Meta के अधिकारी इस सप्ताह के अंत या अगले सप्ताह की शुरुआत में सरकारी प्रतिनिधियों से मुलाकात कर इस पूरे मामले पर आगे चर्चा भी कर सकते हैं।
जिस समय यह वीडियो जारी किया गया था, उस समय देश में NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी था। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने वीडियो में कहा था कि पेपर लीक कोई सामान्य समस्या नहीं है और सरकार इस पर फास्ट-ट्रैक कोर्ट तथा कड़े दंड वाले कानून लाने की दिशा में काम कर रही है। प्रस्तावों पर केंद्रीय मंत्रिमंडल में चर्चा की जानी थी, जिसके बाद संसद में विधेयक लाने की तैयारी थी। इसी बीच बुधवार को लोकसभा ने एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक भी पारित कर दिया।
हर दिन करोड़ों पोस्ट संभालने वाले किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए स्वचालित कंटेंट मॉडरेशन जरूरी होता है। लेकिन जब देश के सर्वोच्च निर्वाचित पद पर बैठे व्यक्ति के सत्यापित अकाउंट की पोस्ट भी कुछ समय के लिए प्रतिबंधित हो जाए, तो इससे सिस्टम की विश्वसनीयता और जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है। सरकार ने साफ कर दिया है कि Meta जैसी बड़ी टेक कंपनी से बेहतर और अधिक भरोसेमंद व्यवस्था की अपेक्षा की जाती है। यही वजह है कि केवल भारत स्थित अधिकारियों के बजाय Meta के वैश्विक अधिकारियों को भी इस मामले में जवाब देने के लिए बुलाया गया।

दूसरी ओर Meta ने इस पूरे मामले के बाद सुधारात्मक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। कंपनी ने प्रधानमंत्री और अन्य प्रमुख हस्तियों की पोस्ट के लिए अतिरिक्त निगरानी और वरिष्ठ स्तर की समीक्षा का आश्वासन दिया है। इससे यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि सरकार द्वारा उठाई गई चिंताओं को गंभीरता से लिया गया है। हालांकि यह देखना अभी बाकी है कि ये नई प्रक्रियाएं भविष्य में इस तरह की घटनाओं को पूरी तरह रोक पाएंगी या नहीं, लेकिन कंपनी ने अपने नए सुरक्षा उपायों का औपचारिक आश्वासन सरकार को दे दिया है।
फिलहाल प्रधानमंत्री मोदी का वीडियो दोबारा फेसबुक पर उपलब्ध है। Meta माफी मांग चुकी है और अतिरिक्त सुरक्षा जांच लागू करने की बात भी कह चुकी है। वहीं सरकार अभी भी इस पूरे मामले में विस्तृत जानकारी और तकनीकी सुधारों की मांग पर कायम है। आने वाले दिनों में Meta और सरकारी अधिकारियों के बीच होने वाली बैठकों से यह तय होगा कि यह मामला यहीं समाप्त होता है या फिर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रमुख भारतीय खातों से जुड़े कंटेंट के प्रबंधन में लंबे समय के लिए नए बदलाव देखने को मिलते हैं।
स्रोत:
PTI की रिपोर्ट, जिसे The Times of India, CNBC-TV18, India TV, The Tribune, Hindustan Times तथा अन्य मीडिया संस्थानों ने सरकारी और कंपनी सूत्रों के हवाले से प्रकाशित किया है।
@रोहित मनराल