जेपी नड्डा से मुलाकात ‘समय की बर्बादी’, विरोध प्रदर्शन जारी, दर्जनों प्रदर्शनकारी हिरासत में — CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका का बड़ा बयान

यह उन खबरों में से एक है जो आज देश के लाखों युवाओं की निराशा, गुस्से और उम्मीदों को एक साथ सामने लाती है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन, जो शुरुआत में एक व्यंग्यात्मक और सोशल मीडिया आधारित अभियान माना जा रहा था, अब देशभर के छात्रों और युवाओं की एक गंभीर आवाज बन चुका है। बीते कई दिनों से CJP के कार्यकर्ता और छात्र दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देकर NEET पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे या बर्खास्तगी की मांग कर रहे हैं।

20 जुलाई 2026 को CJP के दो प्रमुख प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को कई घंटों के इंतजार के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात का अवसर मिला। प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें एक लिखित ज्ञापन सौंपा, जिसमें NEET पेपर लीक की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई, शिक्षा मंत्री को पद से हटाने तथा प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों को न्याय दिलाने जैसी प्रमुख मांगें शामिल थीं।

हालांकि, बैठक के बाद जो बयान सामने आया उसने आंदोलन को और अधिक चर्चा में ला दिया। CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने इस मुलाकात को “समय की बर्बादी” करार दिया। उनका कहना था कि बैठक में कोई ठोस आश्वासन या निर्णय नहीं मिला। उन्होंने कहा कि मंत्री ने उनकी सभी बातें सुनीं और भरोसा दिया कि वे इन मांगों पर पार्टी नेतृत्व से चर्चा करेंगे, लेकिन किसी भी मांग पर स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं दी गई। साथ ही उन्होंने प्रदर्शन समाप्त कर क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल करने की अपील भी की।

दूसरी ओर, सौरव दास ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी साझा करते हुए कहा कि उन्होंने सरकार के सामने छात्रों की हर चिंता स्पष्ट रूप से रखी है, लेकिन जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा।

यह बैठक ऐसे समय हुई जब आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की शुरुआत भले ही एक प्रतीकात्मक और व्यंग्यात्मक अभियान के रूप में हुई हो, लेकिन आज यह उन लाखों छात्रों की आवाज बन चुकी है जो मानते हैं कि परीक्षा प्रणाली में लगातार हो रही गड़बड़ियों ने उनके भविष्य को खतरे में डाल दिया है। आंदोलन में शामिल लोग “कॉकरोच” को संघर्ष, जिद और हर परिस्थिति में जीवित रहने की क्षमता का प्रतीक बताते हैं।

जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से सैकड़ों छात्र, अभिभावक और सामाजिक कार्यकर्ता लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पेपर लीक, कोचिंग माफिया, और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की कमी ने हजारों छात्रों के सपनों को तोड़ दिया है। कई छात्र मानसिक तनाव और अवसाद का सामना कर रहे हैं, जबकि कुछ मामलों में आत्महत्या जैसी दुखद घटनाओं का भी जिक्र किया जा रहा है। प्रदर्शनकारी केवल जांच नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं।

जेपी नड्डा से मुलाकात 'समय की बर्बादी' : CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका का बड़ा बयान

इसी बीच, जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। दिल्ली पुलिस के अनुसार, लगभग 70 लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि बैरिकेड तोड़ने और पथराव की घटनाओं में 50 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए। दूसरी ओर, CJP और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस ने लाठीचार्ज, धक्का-मुक्की और बल प्रयोग किया। पुलिस का कहना है कि संसद जैसे हाई-सिक्योरिटी क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी थी। इस दौरान कई सड़कों को बंद किया गया, कुछ समय के लिए मेट्रो सेवाएं भी प्रभावित रहीं और इंटरनेट सेवाओं पर भी अस्थायी प्रतिबंध लगाए जाने की खबरें सामने आईं।

यह आंदोलन केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं रह गया है। आज देश के लाखों युवाओं के लिए शिक्षा ही बेहतर भविष्य की सबसे बड़ी उम्मीद है। जब परीक्षा पत्र लीक होते हैं, भ्रष्टाचार के आरोप लगते हैं और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तो छात्रों का शिक्षा व्यवस्था से विश्वास उठने लगता है। CJP ने इसी असंतोष को सोशल मीडिया, व्यंग्य और जमीनी आंदोलन के जरिए एक राष्ट्रीय अभियान का रूप दे दिया है।

इस आंदोलन के प्रमुख चेहरों में संस्थापक अभिजीत डिपके का नाम लगातार चर्चा में है। वहीं, सोनम वांगचुक, जो लंबे समय से अनशन पर बैठे हैं, भी इस आंदोलन के समर्थन में प्रमुख आवाज बनकर सामने आए हैं। इन चेहरों ने युवाओं की नाराजगी को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।

जेपी नड्डा के कार्यालय की ओर से जारी जानकारी में कहा गया कि बैठक सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई, दोनों पक्षों के बीच महत्वपूर्ण चर्चा हुई और बाद में लिखित ज्ञापन भी सौंपा गया। उन्होंने प्रदर्शन समाप्त कर सामान्य जनजीवन बहाल करने की अपील की। लेकिन आशुतोष रांका का यह कहना कि पूरी बैठक “समय की बर्बादी” साबित हुई, उन हजारों छात्रों की भावना को दर्शाता है जो कई दिनों से धरना, भूख हड़ताल और प्रदर्शन के बावजूद खुद को अनसुना महसूस कर रहे हैं।

फिलहाल जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई के बाद स्थिति पहले की तुलना में शांत दिखाई दे रही है, लेकिन आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। CJP समर्थक देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखने की अपील कर रहे हैं। यह आंदोलन केवल NEET पेपर लीक तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की परीक्षा प्रणाली, युवाओं के भविष्य, रोजगार और सरकार के प्रति घटते विश्वास जैसे बड़े सवाल भी खड़े कर रहा है।

अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या सरकार इस बैठक के बाद कोई ठोस कदम उठाएगी—क्या निष्पक्ष जांच होगी, क्या शिक्षा व्यवस्था में सुधार होंगे और क्या जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी। फिलहाल इतना तय है कि देश के युवा अपनी आवाज बुलंद कर चुके हैं और वे अब आसानी से पीछे हटने वाले नहीं हैं।

@रोहित मनराल

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top