HT एक्सक्लूसिव: रिटायरमेंट से पहले पूर्व वायुसेना प्रमुख ने सरकार से IAF स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का अधिग्रहण न करने की अपील की

IAF Sports Complex Land Row

भारतीय वायुसेना के निवर्तमान प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने अपनी वर्दी उतारने से कुछ दिन पहले सरकार के सामने एक अहम मांग रखी थी। 26 अक्टूबर को, जबकि उनका रिटायरमेंट 31 अक्टूबर को निर्धारित था, उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर नई दिल्ली के रेस कोर्स एयर फोर्स स्टेशन के भीतर स्थित जमीन के एक बड़े हिस्से पर भारतीय वायुसेना का नियंत्रण बनाए रखने की अपील की। करीब 40 एकड़ में फैली इस जमीन पर एयर फोर्स स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स स्थित है, जिसमें गोल्फ कोर्स, स्विमिंग पूल, गेस्ट कॉटेज, फिटनेस सेंटर और रेस्टोरेंट शामिल हैं। ये सुविधाएं लंबे समय से एयर फोर्स स्टेशन की गतिविधियों का हिस्सा रही हैं।

पत्र से परिचित लोगों के अनुसार, सिंह ने इसमें परिचालन संबंधी जरूरतों और पहले से मौजूद सुविधाओं का उल्लेख किया। उन्होंने रक्षा मंत्री से हस्तक्षेप करने, संबंधित अधिकारियों को जमीन वायुसेना को सौंपने का निर्देश देने और स्टेशन पर आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) की जमीन के हस्तांतरण तथा नियमितीकरण की पूरी प्रक्रिया पर दोबारा विचार करने का अनुरोध किया। इस मामले पर नजर रखने वाले एक अधिकारी ने कहा कि सिंह का मानना था कि इस जमीन का नियंत्रण वायुसेना के पास ही रहना समझदारी होगी।

यह पत्र ऐसे समय आया है, जब इससे पहले ही रक्षा क्षेत्र में इस कदम को लेकर चिंता जताई जा रही थी। पिछले महीने स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को अगले आदेश तक सदस्यों के लिए बंद कर दिया गया था। यह बंदी उस समय हुई जब आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने वर्षों पहले वायुसेना को आवंटित की गई जमीन को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की। हिंदुस्तान टाइम्स ने सबसे पहले 28 अक्टूबर को इस बंदी की खबर प्रकाशित की थी। सदस्यों को संदेश भेजकर बताया गया था कि कॉम्प्लेक्स 28 अक्टूबर की सुबह से बंद रहेगा। कर्मचारियों को भी ड्यूटी पर नहीं आने के निर्देश दिए गए थे। इस अचानक बंदी के कारण निवर्तमान वायुसेना प्रमुखों को आमतौर पर मिलने वाला पारंपरिक ‘गोल्फिंग-आउट’ विदाई समारोह भी रद्द करना पड़ा। यह समारोह उसी दिन आयोजित होने वाला था, जिस दिन कॉम्प्लेक्स के दरवाजे बंद किए गए।

रेस कोर्स एयर फोर्स स्टेशन प्रधानमंत्री आवास, लोक कल्याण मार्ग से बेहद करीब स्थित है। इसकी स्थापना 1940 के दशक में हुई थी और समय के साथ यह केवल एक खेल परिसर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र बन गया। सिंह ने अपने पत्र में स्टेशन की व्यापक भूमिका का उल्लेख किया। इसमें एयर हेडक्वार्टर और 5,000 से अधिक कर्मियों को प्रशासनिक सहायता देना, विवाहित और अविवाहित कर्मियों के लिए आवास, एयरमैन और अग्निवीरवायु के प्रशिक्षण क्षेत्र, सुरक्षा व्यवस्था, मेडिकल सेंटर, स्कूल, यूनिट द्वारा संचालित कैंटीन और मनोरंजन संबंधी सुविधाएं शामिल हैं। अधिकारियों का यह भी कहना है कि दिल्ली इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सेंटर के समन्वय से होने वाली गतिविधियों के दौरान यह स्टेशन मानवरहित हवाई प्रणाली (UAS) से जुड़े खतरों का मुकाबला करने में भी मदद करता है।

MoHUA ने सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह इस जमीन को वापस क्यों लेना चाहता है। हालांकि, यह कदम प्रधानमंत्री आवास के आसपास बड़े भूखंडों को वापस लेने की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। दिल्ली जिमखाना क्लब और जयपुर पोलो ग्राउंड भी पहले इस तरह की चर्चा का हिस्सा रह चुके हैं। भूमि एवं विकास कार्यालय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का सर्वे पूरा कर चुका है और फिलहाल यह परिसर खाली पड़ा है। रक्षा मंत्रालय ने इस पत्र पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है।

IAF के इतिहासकार अंचित गुप्ता ने रेस कोर्स क्षेत्र के साथ इस स्टेशन के लंबे ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख किया है। इसकी शुरुआत द्वितीय विश्व युद्ध के समय से होती है, जब आसपास के क्षेत्र में पैराट्रूपर्स को प्रशिक्षण दिया जाता था और 1942 में यहां एक RAF स्टेशन स्थापित किया गया था। आजादी के बाद रॉयल इंडियन एयर फोर्स ने सितंबर 1947 में यहां एक प्रशासनिक विंग बनाया। जल्द ही यह कर्मियों के रिकॉर्ड, लेखा-जोखा, चिकित्सा सहायता, सुरक्षा, आवास और एयरमैन की आवाजाही से जुड़े कार्यों का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया।

विभाजन के दंगों के दौरान यहां के कर्मियों ने विभिन्न इलाकों में गश्त की, शरणार्थी शिविर स्थापित करने में मदद की और पाकिस्तान से आने वाले परिवारों को आश्रय दिया। बाद में 1947-48 के कश्मीर अभियानों के दौरान इस स्टेशन ने परिवहन और लॉजिस्टिक्स संबंधी सहायता भी उपलब्ध कराई। यहां तक कि 1971 के युद्ध के दौरान पाकिस्तानी वायुसेना के युद्धबंदियों को भी यहां रखा गया था।

स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स लंबे समय से सेवारत अधिकारियों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के लिए एक जाना-पहचाना स्थान रहा है। यहां लोग गोल्फ खेलते थे, स्विमिंग करते थे या शांतिपूर्ण माहौल में भोजन करते थे। इसके अचानक बंद होने से कई लोगों के मन में इन सुविधाओं और युवा कर्मियों के प्रशिक्षण क्षेत्रों के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कुछ सूत्रों ने पहले ही अधिकारियों को बताया था कि यह जमीन केवल मनोरंजन के लिए नहीं है, बल्कि यह प्रशिक्षण और कर्मियों के मनोबल को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

नए वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने 1 नवंबर को पदभार संभाला था। उन्होंने वायुसेना कर्मियों के प्रशिक्षण, पेशेवर उत्कृष्टता, मनोबल, सुरक्षा, कल्याण और सम्मान पर विशेष ध्यान देने की बात कही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि वह इस मामले को आगे बढ़ाएंगे।

फिलहाल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बंद है, जमीन का सर्वे पूरा हो चुका है और निवर्तमान वायुसेना प्रमुख का पत्र रक्षा मंत्री के पास है। अब आगे होने वाले फैसले से यह तय होगा कि वायुसेना दिल्ली में दशकों से उसके परिसर का हिस्सा रही इस जमीन पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगी या सरकार राजधानी के इस हाई-सिक्योरिटी क्षेत्र में जमीन वापस लेने की अपनी व्यापक योजना के तहत इसका अधिग्रहण करेगी।

इस पूरे घटनाक्रम ने दिखा दिया है कि किस तरह दशकों से मौजूद एक महत्वपूर्ण सुविधा भी अचानक सरकारी संस्थानों के बीच अधिकारों की खींचतान का केंद्र बन सकती है।

स्रोत (Sources)

  • हिंदुस्तान टाइम्स की राहुल सिंह द्वारा विशेष रिपोर्टिंग (3 नवंबर 2026 और 28 अक्टूबर 2026 की पिछली रिपोर्ट)।
  • मामले से परिचित अधिकारियों के बयान (नाम गोपनीय रखने की शर्त पर)।
  • IAF इतिहासकार अंचित गुप्ता द्वारा स्टेशन के इतिहास से जुड़ी जानकारी।
  • द ट्रिब्यून, इंडियन एक्सप्रेस, ABP लाइव और जमीन वापस लेने की प्रक्रिया तथा कॉम्प्लेक्स बंद होने से संबंधित अन्य रिपोर्टें।
    *

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top