
नई दिल्ली, 13 सितंबर
भारत मंडपम में BRICS Summit जारी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सुबह काफी स्पष्ट शब्दों में भारत की अध्यक्षता के दौरान समूह के चार प्रमुख स्तंभों पर बात की। उन्होंने BRICS नेताओं से कहा कि इस वर्ष भारत की अध्यक्षता के दौरान लचीलापन (Resilience), नवाचार (Innovation), सहयोग (Cooperation) और सतत विकास (Sustainability) पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्होंने कहा कि इन साझा विचारों को ऐसे कामों में बदलने की कोशिश की गई, जिनका लाभ सभी देशों को मिले और जो वास्तविक रूप से सभी के लिए win-win साबित हों।
ओपन सेशन का शीर्षक था—“Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability: Shaping the Future for Inclusive Global Growth.” मोदी ने कहा कि दुनिया में लगातार बढ़ते तनाव का असर सबसे पहले आम लोगों पर पड़ता है। महामारी, जलवायु आपदाएं और बाधित सप्लाई चेन अब किसी एक जगह तक सीमित नहीं रहतीं। इसी वजह से भारत ने BRICS को ज्यादा लचीला और संकटों से निपटने के लिए तैयार बनाने पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने बताया कि सदस्य देशों ने संक्रामक बीमारियों के लिए BRICS Integrated Early Warning System पर सहमति बनाई है। इसके अलावा आपदाओं के दौरान शुरुआती चेतावनी से जुड़ा डेटा बेहतर तरीके से साझा करने के लिए दिशानिर्देश भी अंतिम रूप दिए गए हैं। लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में ऐसा नया फ्रेमवर्क तैयार किया गया है, जिससे संकट के समय भी सप्लाई चेन को चालू रखने में मदद मिले। समस्या की पहले पहचान करना, पहले से तैयार रहना और तेजी से कार्रवाई करना—यही इसका मुख्य संदेश रहा।
नवाचार के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS Incubator Network का जिक्र किया। यह नेटवर्क सदस्य देशों के स्टार्टअप्स और इनक्यूबेटर्स को आपस में जोड़ने का काम करेगा। भारत ने एक Startup Innovation Fund का प्रस्ताव भी रखा है, जिससे ऐसे नए विचारों को समर्थन मिल सके जो आगे बड़े स्तर पर विकसित हो सकते हैं।
इसके साथ ही डिजिटल कृषि पर एक नया नेटवर्क बनाया गया है। इसका उद्देश्य AI, सैटेलाइट डेटा और डिजिटल तकनीकों को किसानों के ज्यादा करीब लाना है, ताकि तकनीक केवल रिपोर्टों और योजनाओं तक सीमित न रहे, बल्कि जमीन पर किसानों के काम भी आ सके।
प्रधानमंत्री के संबोधन में सहयोग भी एक बड़ा मुद्दा रहा। BRICS के पार्टनर देशों और व्यापक Global South के साथ आउटरीच ने भरोसा बढ़ाने में मदद की है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों की आवाज पहले पीछे रह जाती थी, अब उन्हें भी सुना जा रहा है।
मोदी ने एक बार फिर वही बात दोहराई जो उन्होंने कल कही थी कि BRICS किसी के खिलाफ नहीं है। समूह सर्वसम्मति के आधार पर आगे बढ़ता है और सभी को साथ लेकर चलने की कोशिश करता है। यह बात उस समय खास रही जब भारत मंडपम में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति और अन्य नेता मौजूद थे।
सतत विकास (Sustainability) को भी प्रधानमंत्री ने बराबर महत्व दिया। मोदी ने कहा कि भारत में प्रकृति को मां के रूप में देखा जाता है और विकास तथा पर्यावरण को एक-दूसरे के विरोध में खड़ा करना जरूरी नहीं है।
उन्होंने Smart Grids and Energy Storage के लिए Digital Centre of Excellence का भी उल्लेख किया। इसे स्वच्छ और ज्यादा भरोसेमंद ऊर्जा की दिशा में उठाया गया एक व्यावहारिक कदम बताया गया।
इससे पहले कल BRICS देशों ने New Delhi Declaration को अपनाया था। यह एक लंबा दस्तावेज है, जिसमें सुरक्षा, व्यापार, वित्त और लोगों के बीच संपर्क जैसे कई मुद्दे शामिल हैं।
घोषणापत्र में आतंकवाद की निंदा की गई है, जिसमें पहलगाम हमला भी शामिल है। इसके अलावा विकासशील देशों को नुकसान पहुंचाने वाले एकतरफा टैरिफ और कार्बन बॉर्डर उपायों के खिलाफ बात कही गई है। वैश्विक संस्थानों में भारत और ब्राजील जैसे देशों की अधिक भागीदारी और आवाज की भी मांग की गई है। स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और बेहतर विकास वित्त पर भी जोर दिया गया है।
पहले दिन बंद कमरे में हुई बातचीत के साथ-साथ नेताओं ने इनोवेशन प्रदर्शनी का दौरा किया, पौधारोपण किया और प्रधानमंत्री मोदी द्वारा आयोजित डिनर में हिस्सा लिया। इसके अलावा नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठकें भी जारी हैं।
इस बार सबसे अलग बात यह नजर आ रही है कि पूरी प्रक्रिया को ज्यादा व्यावहारिक रखने की कोशिश की गई है। शुरुआती चेतावनी प्रणाली, स्टार्टअप नेटवर्क, किसानों के लिए डिजिटल तकनीक और सप्लाई चेन से जुड़े प्लान जैसी चीजें सीधे इस्तेमाल में लाई जा सकती हैं।
भारत की BRICS अध्यक्षता जनवरी में शुरू हुई थी और बताया गया है कि इस दौरान इन तैयारियों के लिए देशभर में सैकड़ों बैठकें आयोजित की गईं।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन का अंत एक शांत संदेश के साथ किया। उन्होंने कहा कि देश अलग-अलग परिस्थितियों और पृष्ठभूमि से आते हैं, लेकिन साथ मिलकर सहयोग के जरिए आगे बढ़ सकते हैं और लोगों के लिए उपयोगी काम कर सकते हैं।
उनका संदेश साफ था—विविधता उनकी पहचान बनी रहे, सहयोग उनकी ताकत बने और प्रगति का लाभ सभी तक पहुंचे।
अब New Delhi Declaration आधिकारिक परिणाम के रूप में सामने है। हालांकि इन सभी फ्रेमवर्क को कागज से निकालकर वास्तविक जीवन में कितना लागू किया जाता है, यही तय करेगा कि “win-win” की बात वास्तव में लोगों तक कितनी पहुंचती है।
फिलहाल भारत मंडपम से साफ संदेश यही है कि भारत की अध्यक्षता के दौरान तय किए गए ये चार स्तंभ सिर्फ नारे नहीं थे। लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास वे चार प्रमुख बिंदु रहे, जिनके आधार पर भारत ने अपने अध्यक्षता वर्ष में BRICS के एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश की।
Sources:
IANS, 13 September 2026
Ministry of External Affairs, Government of India
Mathrubhumi English, 13 September 2026
Times Now, 12-13 September 2026
Economic Times, 12 September 2026
Oneindia, 13 September 2026
@रोहित मनराल