
Air India ने अब सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। आज से एयरलाइन और उसकी बजट सहयोगी कंपनी Air India Express में काम करने वाले हर पायलट का प्रतिबंधित पदार्थों और उन दवाओं के लिए अनिवार्य टेस्ट किया जाएगा, जिनका इस्तेमाल विमानन नियमों के तहत पायलटों के लिए अनुमति नहीं है।
इस अभियान के तहत कुल 5,000 से अधिक पायलटों की जांच होगी। इसमें किसी को भी छूट नहीं दी जाएगी।
यह फैसला पिछले हफ्ते हुई एक डरावनी घटना के बाद लिया गया है। 4 अगस्त को Phuket से Delhi आ रही फ्लाइट AI2379 ने उड़ान के दौरान अचानक करीब 300 फीट की ऊंचाई खो दी थी। इस घटना में लगभग 20 यात्री और कुछ क्रू सदस्य घायल हो गए थे। Airbus A320 विमान आखिरकार सुरक्षित रूप से Delhi में उतर गया, लेकिन इस घटना ने यात्रियों और विमानन क्षेत्र में चिंता पैदा कर दी।
घटना के तुरंत बाद दोनों पायलटों को उड़ान ड्यूटी से हटा दिया गया और मामले की जांच शुरू कर दी गई। इसके बाद दोनों के ड्रग टेस्ट किए गए। सूत्रों के अनुसार, कन्फर्मेटरी लैब जांच में कैप्टन का टेस्ट marijuana के लिए पॉजिटिव आया। हालांकि एयरलाइन ने आधिकारिक तौर पर पदार्थ की पुष्टि नहीं की है, लेकिन कई रिपोर्टों में यही जानकारी सामने आई है।
आज सुबह कर्मचारियों को भेजे गए एक मेमो में Air India ने अपना रुख साफ कर दिया। एयरलाइन पहले से ही DGCA के नियमों का पालन करती है, जिनके तहत हर साल कम से कम 10 प्रतिशत फ्लाइट क्रू का रैंडम ड्रग टेस्ट किया जाता है। ये नियम यूरोप और अमेरिका में लागू व्यवस्थाओं से भी मिलते-जुलते हैं। लेकिन इस घटना के बाद एयरलाइन को लगा कि केवल इतना पर्याप्त नहीं है।
मेमो में कहा गया, “फिर भी अब हमें लगता है कि इससे आगे जाना जरूरी है।” हर पायलट की पूरी स्क्रीनिंग का उद्देश्य यह दिखाना है कि एयरलाइन सुरक्षा को लेकर गंभीर है और यात्रियों का भरोसा बनाए रखना चाहती है।

यह टेस्ट 13 अगस्त से शुरू हो गए हैं। इन्हें Gurugram स्थित ट्रेनिंग अकादमी में ट्रेनिंग सेशन के दौरान, उड़ानों के बाद ब्रीफिंग सेंटर पर, एयरलाइन के कार्यालयों में या पायलट के बेस द्वारा तय किए गए स्थान पर किया जा रहा है। कोशिश यह है कि पूरे पायलट फोर्स की जांच हो जाए और एयरलाइन के ऑपरेशन पर असर भी न पड़े।
यह कदम Air India के लिए ऐसे समय में आया है जब एयरलाइन पहले से ही मुश्किल दौर से गुजर रही है। जून 2025 में Ahmedabad से London जा रही फ्लाइट के क्रैश में 260 लोगों की मौत हुई थी। केवल एक यात्री इस हादसे में बच पाया था। इस घटना के बाद एयरलाइन के प्रति लोगों के भरोसे को बड़ा झटका लगा था और कंपनी यह अच्छी तरह समझती है। अपने मेमो में एयरलाइन ने भरोसे को अपनी सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति बताया है।
मौजूदा DGCA नियमों के अनुसार, पहली बार ड्रग टेस्ट पॉजिटिव आने का मतलब यह नहीं है कि पायलट का लाइसेंस तुरंत रद्द हो जाएगा। आमतौर पर पायलट को रिहैबिलिटेशन के लिए भेजा जाता है। इसके बाद उसे दोबारा क्लीन टेस्ट और मेडिकल क्लियरेंस हासिल करना होता है, तभी वह फिर से उड़ान भर सकता है।
दूसरी बार नियमों का उल्लंघन होने पर तीन साल तक का निलंबन हो सकता है। तीसरी बार मामला सामने आने पर पायलट का लाइसेंस हमेशा के लिए खत्म किया जा सकता है। Air India के अपने आंतरिक नियम इससे भी ज्यादा सख्त बताए जा रहे हैं। ऐसे में Phuket फ्लाइट से जुड़े कैप्टन को आंतरिक जांच पूरी होने के बाद कंपनी की ओर से और कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
इन टेस्ट में आमतौर पर psychoactive substances की जांच की जाती है। इसमें cannabis, cocaine, amphetamines, opiates और कुछ ऐसी दवाएं शामिल हैं, जिन्हें उड़ान के दौरान पायलटों के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होती।
शुरुआती जांच urine samples के जरिए की जाती है। अगर किसी टेस्ट में कोई प्रतिबंधित पदार्थ सामने आता है, तो पायलट को तुरंत उड़ान ड्यूटी से हटा दिया जाता है और इसके बाद अधिक विस्तृत लैब टेस्ट कराया जाता है।
विमानन क्षेत्र से जुड़े सुरक्षा विशेषज्ञ लंबे समय से यह सवाल उठाते रहे हैं कि अगर केवल 10 प्रतिशत क्रू का रैंडम टेस्ट किया जाए, तो कुछ मामलों के सामने न आने की संभावना बनी रहती है। हर पायलट की जांच करना निश्चित रूप से ज्यादा महंगा और बड़ा कदम है, लेकिन इससे एयरलाइन एक स्पष्ट संदेश दे रही है।
हाल की घटनाओं के बाद भारतीय एयरलाइंस में यात्रा करने वाले जिन यात्रियों के मन में सुरक्षा को लेकर चिंता है, उनके लिए यह कदम भरोसा बढ़ाने वाला साबित हो सकता है।
Phuket फ्लाइट में हुई altitude drop की जांच अभी जारी है। शुरुआती चर्चाओं में turbulence की बात सामने आई थी, लेकिन बाद की जानकारियों में संकेत मिला कि विमान के ऊंचाई खोने से ठीक पहले hydraulic और control system से जुड़े warnings सामने आए थे।
क्या कैप्टन की स्थिति का इस घटना में कोई रोल था, यह अभी स्पष्ट नहीं है। जांच पूरी होने तक दोनों पायलट उड़ान ड्यूटी से बाहर रहेंगे।
Ministry of Civil Aviation भी मौजूदा नियमों की समीक्षा कर रहा है। ड्रग टेस्ट के प्रतिशत को बढ़ाने और नियम तोड़ने पर सजा को और सख्त करने की चर्चा चल रही है। हालांकि Air India ने नए नियमों का इंतजार नहीं किया। एयरलाइन ने खुद ही आगे बढ़कर यह कदम उठाने का फैसला किया है।
पायलटों के लिए इसका मतलब है कि पहले से ही बेहद जिम्मेदारी वाले इस काम में अब जांच की एक और परत जुड़ गई है। वहीं एयरलाइन के लिए यह भरोसा दोबारा बनाने की कोशिश है।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पायलटों की यह पूरी टेस्टिंग प्रक्रिया कितनी आसानी से पूरी होती है और Phuket फ्लाइट की जांच में आखिरकार क्या सामने आता है। यही बातें तय करेंगी कि आने वाले हफ्तों में इस पूरे मामले को किस तरह याद किया जाएगा।
फिलहाल हर पायलट जानता है कि उसका टेस्ट किया जाएगा। और यात्रियों के लिए कम से कम इतना साफ है कि एयरलाइन इस मुद्दे को पूरी गंभीरता के साथ ले रही है।
Sources:
BBC News, The Hindu Business Line, The Straits Times, The Indian Express, The Tribune, India Today, Business Standard, Times of India और 11–13 अगस्त 2026 की संबंधित रिपोर्ट्स।
@Rohit Manral