सुपरस्टार की तरह स्वागत: प्रियंका गांधी ने धर्मेंद्र प्रधान के सम्मान पर भाजपा सांसदों को घेरा

प्रियंका गांधी का BJP पर हमला: धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत को बताया शर्मनाक | NEET पेपर लीक विवाद

कल मंगलवार को कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने संसद परिसर में भाजपा सांसदों द्वारा पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का जिस तरह स्वागत किया, उस पर तीखा हमला बोला।

शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के केवल दो दिन बाद जब धर्मेंद्र प्रधान संसद पहुंचे, तो भाजपा के कुछ सांसदों ने उनका पारंपरिक टोपी, अंगवस्त्र पहनाकर और “प्रधान ज़िंदाबाद” के नारे लगाकर स्वागत किया। पूरा माहौल ऐसा था मानो कोई बड़ा विजेता लौटकर आया हो। इस पर प्रियंका गांधी ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बेहद शर्मनाक है।

उन्होंने कहा, “क्या आपको नहीं लगता कि यह शर्मनाक है? धर्मेंद्र प्रधान ने किन परिस्थितियों में इस्तीफा दिया, यह पूरा देश जानता है। लेकिन कल संसद परिसर में उनका स्वागत ऐसे किया गया, जैसे वह कोई सुपरस्टार हों।”

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद संसद में हुए स्वागत पर प्रियंका गांधी ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। जानिए NEET पेपर लीक विवाद, छात्रों के प्रदर्शन और राहुल गांधी की प्रतिक्रिया से जुड़ी पूरी खबर।

दरअसल, यह इस्तीफा किसी सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं था। पिछले कई हफ्तों से देशभर में छात्र सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे थे। NEET पेपर लीक विवाद और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं ने लाखों छात्रों का भरोसा तोड़ दिया। जंतर-मंतर समेत देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होते गए। जिन छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ी, उनमें से कई ने मानसिक तनाव झेला और कुछ परिवारों ने अपने बच्चों को हमेशा के लिए खो दिया।

लगातार बढ़ते जनदबाव के बीच 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि वह ऐसा इसलिए कर रहे हैं ताकि “राष्ट्र विरोधी ताकतें इस मुद्दे का फायदा न उठा सकें और छात्र दोबारा अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें।” हालांकि विपक्ष और आंदोलन कर रहे छात्रों ने इसे युवाओं के संघर्ष और दबाव की जीत बताया।

लेकिन इस्तीफे के महज 48 घंटे बाद ही संसद में धर्मेंद्र प्रधान का नायकों जैसा स्वागत हुआ। दूसरी ओर विपक्षी सांसदों ने “चोर-चोर, पेपर चोर” के नारे लगाए। दोनों पक्षों का यह विरोधाभास सभी के सामने साफ दिखाई दिया।

प्रियंका गांधी ने केवल स्वागत पर ही सवाल नहीं उठाए। उन्होंने कहा कि आज भी छात्रों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम पर वायरल हो रही उन तस्वीरों का जिक्र किया, जिनमें कुछ छात्राओं पर आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने सरकार से सवाल पूछा कि क्या सरकार वास्तव में छात्रों की समस्याओं का समाधान चाहती है या फिर केवल उनकी आवाज दबाने में लगी हुई है?

उन्होंने कहा, “यह बिल्कुल गलत है। मोदी सरकार पर अब कोई भरोसा नहीं कर सकता।”

इससे एक दिन पहले राहुल गांधी भी इस पूरे मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दे चुके थे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि धर्मेंद्र प्रधान भारत की भ्रष्ट शिक्षा व्यवस्था और शिक्षा तंत्र की विफलता का प्रतीक बन चुके हैं। राहुल गांधी ने कहा कि इस व्यवस्था ने 26 युवाओं की जान ले ली और लाखों छात्रों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया।

प्रियंका गांधी धर्मेंद्र प्रधान स्वागत विवाद

राहुल गांधी के मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा नहीं दिया, बल्कि युवाओं के गुस्से और आंदोलन के दबाव के कारण उन्हें पद छोड़ना पड़ा। उन्होंने भाजपा द्वारा संसद में उनका सम्मान किए जाने पर भी सवाल उठाते हुए लिखा, “यह सम्मान नहीं है, बल्कि लाखों छात्रों के बर्बाद भविष्य का जश्न मनाया जा रहा है। देश का हर छात्र यह सब देख रहा है और इसमें शामिल हर चेहरे को याद रखेगा।”

पूरा घटनाक्रम कई लोगों के लिए असहज करने वाला रहा। एक ओर वे छात्र हैं जिन्होंने महीनों और वर्षों तक मेहनत करके परीक्षाओं की तैयारी की, लेकिन पेपर लीक और अनियमितताओं के कारण उनका भविष्य संकट में पड़ गया। दूसरी ओर वही मंत्री, जिनके कार्यकाल में यह विवाद हुआ, उनका संसद में विजेता की तरह स्वागत किया गया। इससे यह संदेश जाता है कि सत्ता के गलियारों में राजनीतिक एकजुटता को छात्रों की पीड़ा से अधिक महत्व दिया जा रहा है।

राजनीति में ऐसे दृश्य नए नहीं हैं। कई बार कोई नेता विवादों में घिरता है और कुछ समय बाद उसकी पार्टी उसके समर्थन में मजबूती से खड़ी दिखाई देती है। लेकिन जब मामला करोड़ों छात्रों के भविष्य, उनके सपनों और शिक्षा व्यवस्था पर भरोसे का हो, तब इस तरह का सार्वजनिक सम्मान कई लोगों को संवेदनहीन और असंवेदनशील प्रतीत होता है।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विरोध प्रदर्शन भले कुछ हद तक शांत हो गए हों, लेकिन छात्रों और अभिभावकों के मन में मौजूद नाराजगी अभी भी खत्म नहीं हुई है। जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उनके लिए किसी भी राजनीतिक नारे से बड़ा उनका दर्द है।

प्रियंका गांधी के शब्द इसलिए असरदार लगे क्योंकि उन्होंने किसी जटिल राजनीतिक बहस की बजाय एक सीधा सवाल पूछा—क्या यह शर्मनाक नहीं है?

भारत जैसे देश में, जहां शिक्षा आज भी गरीबी से बाहर निकलने और बेहतर भविष्य बनाने का सबसे बड़ा माध्यम मानी जाती है, वहां शिक्षा व्यवस्था से जुड़े संकटों के प्रति नेताओं का रवैया केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि करोड़ों युवाओं के विश्वास का प्रश्न भी बन जाता है।

स्रोत:

  • इकोनॉमिक टाइम्स, 28 जुलाई 2026
  • इंडिया टुडे, 28 जुलाई 2026
  • जुलाई 2026 में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शनों से संबंधित विभिन्न रिपोर्ट्स

@रोहित मनराल

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