राहुल गांधी का नया सियासी दांव: ‘वोट चोरी’, रामलीला मैदान की रैली और बहस की चुनौती

Rahul Gandhi Vote Chori Rally

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एक बार फिर सियासी चर्चाओं के केंद्र में हैं। इस बार उनका पूरा फोकस ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर है। राहुल गांधी का आरोप है कि बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं और चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर किया जा रहा है।

1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन ने एक बड़ी रैली आयोजित की। इस रैली में राहुल गांधी सबसे आगे नजर आए। उन्होंने मंच से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर वोट चोरी में शामिल होने का आरोप लगाया और कहा कि एक दिन उन्हें जेल जाना पड़ेगा। राहुल गांधी ने दावा किया कि करीब 13.5 करोड़ मतदाताओं के नाम गलत तरीके से वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं।

इस रैली में ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई विपक्षी नेता मौजूद रहे। इससे पहले दिन में कनॉट प्लेस इलाके से रामलीला मैदान तक मार्च भी निकाला गया, जिसमें पार्टी कार्यकर्ताओं, कुछ छात्रों और आम लोगों ने हिस्सा लिया।

इस दौरान कनॉट प्लेस की दुकानें बंद रहीं। राहुल गांधी ने बाद में आरोप लगाया कि इससे आम व्यापारियों को नुकसान हुआ और बीजेपी ने जानबूझकर ऐसा करवाया।

फिलहाल विपक्ष का सबसे बड़ा नारा बन चुका है – ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’। विपक्ष की मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा दें और संसद में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) तथा EVM की विश्वसनीयता पर पूरी बहस हो।

राहुल गांधी लगातार यह आरोप लगाते रहे हैं कि 2024 के लोकसभा चुनाव निष्पक्ष नहीं थे और चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी का वही पैटर्न अब भी जारी है।

मोदी को राहुल गांधी की खुली बहस की चुनौती

इसके बाद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक व्यक्तिगत और सीधी चुनौती दे दी।

दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष पर सोशल मीडिया के जरिए अफवाहें फैलाने और देश के विकास में बाधा डालने वाली ताकत होने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि विदेशी सोशल मीडिया प्रधानमंत्री का पूरा समर्थन करता है और उन्हें खुली बहस की चुनौती दी।

राहुल गांधी ने कहा कि दोनों नेता एक टेबल पर बैठें। वहां मीडिया भी मौजूद हो, युवा भी मौजूद हों और यहां तक कि मोहन भागवत को इस बहस का जज बना दिया जाए।

उन्होंने बहस के लिए कई मुद्दे भी गिनाए, जिनमें देश की वित्तीय व्यवस्था, अमेरिका के साथ डील, अडानी मामले को क्यों बंद किया गया और एपस्टीन से जुड़े संदर्भ जैसे विषय शामिल थे। अपनी पोस्ट के अंत में उन्होंने हैप्पी दिवाली भी लिखा।

राहुल गांधी की इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर काफी प्रतिक्रिया मिली।

वहीं, अमित शाह ने हैदराबाद में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि राहुल गांधी कभी प्रधानमंत्री नहीं बन पाएंगे। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि पार्टी सिर्फ अपने वोट बैंक को बचाने के लिए चुनावी वोटर लिस्ट के रिवीजन का विरोध कर रही है।

निर्मला सीतारमण ने भी दी बहस की चुनौती

अब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी राहुल गांधी को संसद के भीतर SIR और EVM के मुद्दे पर बहस करने की औपचारिक चुनौती दी है।

उन्होंने कहा कि अमित शाह पहले ही विपक्ष को विशेष संसद सत्र बुलाने का प्रस्ताव दे चुके हैं, अगर विपक्ष ऐसा चाहता है।

ऐसे में अब सवाल यह है कि विपक्ष इस मुद्दे को संसद के पटल पर उठाता है या फिर इसे सड़कों और सोशल मीडिया तक ही सीमित रखता है।

महीनों से ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर सक्रिय हैं राहुल गांधी

यह कोई अचानक लिया गया राजनीतिक रुख नहीं है। राहुल गांधी पिछले कई महीनों से लगातार वोट चोरी के मुद्दे को उठा रहे हैं।

वह संसद, प्रेस कॉन्फ्रेंस और INDIA गठबंधन के नेताओं के साथ बैठकों में इस मुद्दे पर अपनी बात रख चुके हैं।

हाल ही में एक आंतरिक बैठक में उन्होंने अपने सहयोगियों से कहा था कि जब यह अभियान शुरू हुआ था, तब करीब 20 प्रतिशत लोग ही इस दावे पर विश्वास करते थे, लेकिन अब यह संख्या काफी बढ़ गई है।

राहुल गांधी ने गठबंधन के नेताओं से यह भी कहा है कि जरूरत पड़ने पर सभी को 24 घंटे के भीतर आंदोलन और प्रदर्शन के लिए तैयार रहना चाहिए।

राहुल गांधी से जुड़ी दूसरी खबरें भी चर्चा में

इन सबके बीच राहुल गांधी से जुड़ी कुछ दूसरी खबरें भी सामने आई हैं।

  • उत्तर प्रदेश की एक अदालत ने 2018 के एक पुराने मानहानि मामले में राहुल गांधी को बरी कर दिया। यह मामला अमित शाह पर की गई टिप्पणी से जुड़ा था।
  • पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर राहुल गांधी के काफिले की एक एंबुलेंस से टक्कर हो गई थी, जिसमें कुछ लोगों के घायल होने की खबर आई थी।
  • राहुल गांधी की वियतनाम यात्रा को लेकर बीजेपी ने राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश की।
  • उन्होंने टाटा संस के मामले में सरकार की कथित दखलअंदाजी को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

क्या विपक्ष चुनावी व्यवस्था के मुद्दे पर एकजुट रह पाएगा?

पूरी तस्वीर देखें तो राहुल गांधी की कोशिश है कि विपक्ष को एक ऐसे मुद्दे पर एकजुट रखा जाए, जो सीधे देश की चुनावी व्यवस्था और लोकतंत्र पर भरोसे से जुड़ा है।

रामलीला मैदान की रैली में विपक्षी दलों की एकजुटता जरूर दिखाई दी, लेकिन अब असली परीक्षा यह है कि क्या यह शक्ति प्रदर्शन लंबे समय तक चलने वाले जनआंदोलन में बदल पाएगा।

शहरी इलाकों से रैली में उतनी बड़ी संख्या में लोग नहीं पहुंचे, जितनी उम्मीद की जा रही थी। वहीं बीजेपी ने इस पूरे अभियान को अराजकता फैलाने और चुनावी हार को स्वीकार न करने की कोशिश बताया है।

इसके बावजूद कई विपक्षी दलों का एक मंच पर आना और ‘वोट चोरी’ का मुद्दा आम राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन जाना यह दिखाता है कि राहुल गांधी का यह अभियान अपनी जगह बना चुका है।

फिलहाल राहुल गांधी विपक्ष की राजनीति में वही रणनीति अपनाते दिखाई दे रहे हैं, जिसके तहत वह लगातार सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, मुद्दे को जिंदा रख रहे हैं और सत्ता पक्ष को जवाब देने के लिए मजबूर कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी को दी गई खुली बहस की चुनौती अभी भी कायम है। अब देखना होगा कि प्रधानमंत्री या सरकार किसी भी रूप में इस चुनौती को स्वीकार करती है या नहीं।

फिलहाल सड़कों से लेकर टीवी स्टूडियो तक इस मुद्दे पर सियासी बहस जारी रहने वाली है।

स्रोत: बिजनेस स्टैंडर्ड, इकोनॉमिक टाइम्स, द हिंदू, NDTV, इंडियन एक्सप्रेस, नेशनल हेराल्ड और राहुल गांधी सहित अन्य राजनीतिक नेताओं के हालिया सार्वजनिक बयान एवं सोशल मीडिया पोस्ट।

@Rohit Manral

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