
नई दिल्ली, 4 अक्टूबर 2026 – मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन रविवार को लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। शाम तक अशोका रोड और शांगरी-ला चौराहे के आसपास का इलाका बड़े पैमाने पर हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों से भरा नजर आया। जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे सैकड़ों छात्रों, कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। हिरासत में लिए गए लोगों में AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा भी शामिल थीं, जिन्हें लगातार तीसरे दिन हिरासत में लिया गया। वहीं, एक महिला पत्रकार को भी हिरासत में लिया गया, जिसने एक दिन पहले इसी प्रदर्शन को कवर करते हुए एक पुलिस अधिकारी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था।
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के बैनर तले और कई नागरिक संगठनों के समर्थन से आयोजित यह मार्च दोपहर में आंध्र भवन सर्कल से शुरू हुआ। प्रदर्शनकारियों के हाथों में ऐसे पोस्टर और तख्तियां थीं, जिनमें ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को तत्काल रोकने की मांग की गई थी। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि SIR प्रक्रिया के कारण बड़े पैमाने पर और अनियमित तरीके से मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। भीड़ में अलग-अलग विश्वविद्यालयों के छात्र, युवा संगठनों के सदस्य और कई वरिष्ठ कार्यकर्ता शामिल थे, जो शुक्रवार से इस आंदोलन का हिस्सा बने हुए हैं।
पुलिस ने पहले से ही कई स्तरों पर बैरिकेडिंग कर रखी थी। जब मार्च शांगरी-ला चौराहे तक पहुंचा तो अधिकारियों ने रास्ता रोक दिया। इसके बाद पिछले तीन दिनों की तरह धक्का-मुक्की, प्रदर्शनकारियों को खींचकर ले जाने और लोगों को बसों व निजी वाहनों में बैठाने का सिलसिला शुरू हुआ। बाद में सामने आए वीडियो में महिला प्रदर्शनकारियों के साथ पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा किए जा रहे व्यवहार को देखा गया। एक वीडियो क्लिप में एक व्यक्ति को बस में धकेलते हुए उसका सिर नीचे दबाते हुए भी देखा गया।
शाम करीब 5 बजे नेहा बोरा को हिरासत में लिया गया। AISA का दावा है कि बिना नेम बैज पहने पुरुष कर्मियों ने उन्हें एक निजी SUV में खींचकर बैठाया और वाहन के अंदर कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी। उनके सहयोगियों ने बताया कि कुछ समय तक उन्हें उनकी सही लोकेशन की जानकारी नहीं थी। बाद में पुलिस ने पुष्टि की कि उन्हें हिरासत में लेकर नरेला इंडस्ट्रियल एरिया पुलिस स्टेशन ले जाया गया था। शाम तक उन्हें और अधिकांश अन्य हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा कर दिया गया।
शनिवार को यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला पत्रकार को भी रविवार को हिरासत में लिया गया। वह पिछली रात अपनी शिकायत लेकर पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन गई थीं और रविवार को मार्च में शामिल हुईं। हिरासत में लिए जाने के बाद उन्होंने आसपास मौजूद लोगों से कहा, “आरोपी पुलिस अधिकारी को गिरफ्तार करने के बजाय उन्होंने मुझे हिरासत में लिया है। क्या यही न्याय है?”
दिल्ली पुलिस ने कहा है कि शनिवार के प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज कराई थीं। पुलिस के अनुसार, इन शिकायतों को जांच के लिए क्राइम ब्रांच को भेज दिया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, अभी तक कोई FIR दर्ज नहीं की गई है।
हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए। कुछ रिपोर्टों में यह संख्या करीब 250 बताई गई, जबकि कुछ में कहा गया कि मध्य दिल्ली के अलग-अलग स्थानों से करीब 500 लोगों को हिरासत में लेकर 10 से 15 बसों में ले जाया गया। बाद में पुलिस सूत्रों ने लगभग 110 लोगों को हिरासत में लिए जाने की बात कही और दावा किया कि झड़पों के दौरान 12 से 15 पुलिसकर्मी घायल हुए। पूरे दिन भारी पुलिस बल की तैनाती रही। करीब 5,000 कर्मियों की तैनाती की गई, जिसमें रैपिड एक्शन फोर्स की टीमें, ड्रोन और CCTV निगरानी भी शामिल थी। नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा अभी भी लागू है।
यह प्रदर्शन मतदाता सूचियों के चल रहे SIR को लेकर बढ़ते विरोध का हिस्सा है। विपक्षी दलों और कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया है और कहा है कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया भविष्य के चुनावों की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती है। वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया डुप्लीकेट और अयोग्य प्रविष्टियों को हटाकर मतदाता सूची को साफ करने के उद्देश्य से की जा रही है। ज्ञानेश कुमार की ओर से सड़क पर चल रहे इन विरोध प्रदर्शनों को लेकर अब तक कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की गई है।
जिन प्रदर्शनकारियों को पुलिस वाहनों में नहीं ले जाया गया, उनके बीच माहौल में विरोध जारी रखने का रुख दिखाई दिया। बैरिकेड्स के पास दोबारा इकट्ठा हुए कई युवा प्रदर्शनकारियों ने कहा, “हम कल फिर आएंगे।” इसी मुद्दे को लेकर मुंबई में भी प्रदर्शन की खबरें सामने आईं, जहां ठाकरे बंधुओं ने मार्च का नेतृत्व किया।
देर शाम तक हिरासत में लिए गए अधिकांश लोगों को रिहा कर दिया गया। पुलिस उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला पत्रकार को भी छोड़ दिया गया। हालांकि, उनके और अन्य दो महिलाओं द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब अभी सामने नहीं आए हैं। क्राइम ब्रांच की जांच अभी प्रभावी रूप से शुरू होनी बाकी है और ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग के साथ दिल्ली की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी रहा।
स्रोत: द हिंदू, इंडियन एक्सप्रेस, द वायर, टाइम्स ऑफ इंडिया, CNBC-TV18, टेलीग्राफ इंडिया, डेक्कन हेराल्ड, न्यूज़18, हिंदुस्तान टाइम्स (3–5 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट्स)।
@रोहित मनराल