₹6 लाख करोड़ की GDP Revision पर सुभाष गर्ग और गौरव वल्लभ आमने-सामने, 7.8% Growth पर छिड़ी बहस

₹6 लाख करोड़ GDP Revision

भारत ने वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के बीच की GDP के आंकड़े जारी किए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में देश की अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी। आंकड़ा मजबूत नजर आता है। यह RBI के 7 प्रतिशत के अधिक सतर्क अनुमान से भी बेहतर है। प्रधानमंत्री ने भी इस पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे सामूहिक ताकत का परिणाम बताया और कहा कि निराशावादियों को जवाब मिल गया है।

लेकिन इसके बाद पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग टेलीविजन पर आए और उन्होंने कहा कि ठहरिए, इन आंकड़ों को सही तरीके से देखने की जरूरत है।

गर्ग की बात काफी सीधी है और वह इसे अलग-अलग चैनलों पर दोहरा चुके हैं। पिछले साल की इसी तिमाही में मौजूदा कीमतों पर GDP करीब ₹86 लाख करोड़ बताई गई थी। लेकिन हालिया रिलीज में इसी आधार आंकड़े को घटाकर करीब ₹80 लाख करोड़ कर दिया गया है। यानी लगभग ₹6 लाख करोड़ की कमी।

अगर इस साल की मौजूदा कीमतों वाली GDP करीब ₹88.3 लाख करोड़ को पिछले साल के पुराने, बिना संशोधित आंकड़े ₹86 लाख करोड़ से तुलना करें, तो नाममात्र की वृद्धि करीब 2.6 प्रतिशत बैठती है। इसमें करीब 2–2.5 प्रतिशत की महंगाई को घटा दें तो वास्तविक वृद्धि करीब शून्य या अधिकतम बहुत मामूली नजर आती है।

गर्ग का तर्क है कि पिछले साल के आधार को इतनी बड़ी मात्रा में नीचे करने से इस साल की Growth अपने आप काफी मजबूत दिखाई देने लगती है। मौजूदा आंकड़ों के हिसाब से नाममात्र की वृद्धि 10.3 प्रतिशत बनती है, जिसे Deflator के बाद वास्तविक वृद्धि के रूप में 7.8 प्रतिशत बताया गया है।

उन्होंने इस स्तर की Revision को अभूतपूर्व बताया। उन्होंने कहा, “इस तरह की अभूतपूर्व Revision मैंने अपनी जिंदगी में बिल्कुल नहीं देखी।” उनका यह भी कहना है कि Manufacturing और Private Consumption के आंकड़े अर्थव्यवस्था में इतनी मजबूत तेजी की स्पष्ट तस्वीर नहीं दिखाते।

गर्ग की मुख्य मांग यह है कि सरकार साफ तौर पर बताए कि मौजूदा कीमतों वाली GDP के पिछले अनुमान को इतनी बड़ी मात्रा में नीचे क्यों किया गया। उनका कहना है कि मुद्दा सिर्फ Deflator या Base Year बदलने का नहीं है, बल्कि चिंता इस बात को लेकर है कि पिछले साल के अनुमान में इतनी बड़ी कटौती क्यों हुई।

गौरव वल्लभ ने किया पलटवार

इसके बाद प्रधानमंत्री की Economic Advisory Council के सदस्य गौरव वल्लभ इस बहस में शामिल हुए। India Today के Marya Shakil द्वारा होस्ट किए गए इसी Debate में वल्लभ ने गर्ग के तर्क का जोरदार विरोध किया।

उनका कहना था कि गर्ग असल में दो अलग-अलग GDP Series को मिला रहे हैं। एक तरफ पुरानी 2011-12 Base Year Series के आंकड़े हैं और दूसरी तरफ नई 2022-23 Base Year Series के आंकड़े। उनके मुताबिक, इस तरह दोनों की सीधी तुलना करना सही नहीं है।

जब Base Year बदला जाता है तो केवल कीमतों को अपडेट नहीं किया जाता। इसके साथ अर्थव्यवस्था को मापने के लिए बेहतर और नए Data Sources भी शामिल किए जाते हैं। इसमें GST Records, व्यापक Coverage, नए Surveys, Updated Index of Industrial Production और Producer Price Index Series जैसे स्रोत शामिल हैं।

इसका मतलब यह है कि अर्थव्यवस्था को मापने का तरीका भी अधिक व्यापक हो जाता है।

वल्लभ के अनुसार, ₹86 लाख करोड़ का आंकड़ा पुरानी Series से जुड़ा था, जबकि नई Series में उसी तिमाही के लिए तुलनीय आंकड़ा करीब ₹80 लाख करोड़ है। इसलिए उनकी दलील है कि अगर समान Series के आंकड़ों की तुलना की जाए तो सरकार द्वारा जारी Growth Rate सही बैठती है।

वल्लभ ने High-Frequency Indicators, Gross Fixed Capital Formation और Labour Force के आंकड़ों का भी हवाला दिया। उनके मुताबिक ये संकेतक एक अपेक्षाकृत मजबूत अर्थव्यवस्था की तस्वीर पेश करते हैं।

उन्होंने गर्ग की 2.6 प्रतिशत Growth वाली गणना को तथ्यात्मक और आर्थिक रूप से गलत बताया, क्योंकि इसमें अलग-अलग Series के आंकड़ों को मिलाया गया है।

MoSPI ने भी दी सफाई

सरकार की ओर से Ministry of Statistics and Programme Implementation (MoSPI) ने भी GDP Revision को लेकर विस्तृत सफाई जारी की।

मंत्रालय के अनुसार, करीब ₹86.05 लाख करोड़ से ₹80 लाख करोड़ तक का बदलाव एक ही बार में नहीं हुआ। इसमें बदलाव चरणबद्ध तरीके से हुआ। इसका एक बड़ा हिस्सा फरवरी 2026 में नई Base Year Series लागू किए जाने के समय ही सामने आ चुका था। इसके बाद Data Updates के जरिए भी आंकड़ों में बदलाव हुए।

MoSPI का कहना है कि यह पिछले साल के आंकड़ों में जानबूझकर की गई कोई ऐसी कटौती नहीं थी, जिसका उद्देश्य इस साल की Growth को ज्यादा आकर्षक दिखाना हो।

मंत्रालय ने फिर से यही बात दोहराई कि अलग-अलग GDP Series के आंकड़ों को आपस में मिलाकर तुलना नहीं की जा सकती।

Revision का Timing भी अहम

इन आंकड़ों में हुए बदलाव के Timing को समझना भी महत्वपूर्ण है।

₹6 लाख करोड़ के इस Adjustment का एक बड़ा हिस्सा कई महीने पहले ही हो चुका था, जब नई GDP Series को फरवरी 2026 में पेश किया गया था। इस साल की पहली तिमाही यानी Q1 का ताजा GDP आंकड़ा अगस्त के अंत में जारी किया गया।

इसके बावजूद सुभाष गर्ग अपने सवालों से पीछे नहीं हटे हैं।

वह चाहते हैं कि सरकार ऐतिहासिक आंकड़े सामने रखे और बताए कि क्या इससे पहले कभी मौजूदा कीमतों वाली GDP में इतनी बड़ी प्रतिशत Revision हुई है।

उन्होंने यह भी कहा कि पिछले वर्षों में दूसरी दिशा यानी ऊपर की ओर भी इसी तरह के बड़े Revisions देखने को मिले हैं। इससे यह सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है कि GDP के आंकड़ों में इतने बड़े बदलाव किस तरह और क्यों होते हैं।

मामला सिर्फ दो अर्थशास्त्रियों की TV Debate तक सीमित नहीं

यह मामला अब केवल दो Experts के बीच टेलीविजन बहस तक सीमित नहीं रहा है।

Congress ने भी सुभाष गर्ग की टिप्पणियों को आधार बनाते हुए सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी का कहना है कि 7.8 प्रतिशत का आंकड़ा Statistical Jugglery है और वास्तविक तस्वीर करीब 2.6 प्रतिशत की Growth के आसपास है।

वहीं कुछ Independent Economists ने GDP Methodology के कुछ हिस्सों पर सवाल उठाए हैं, खास तौर पर Manufacturing को Deflate करने के तरीके को लेकर।

दूसरी तरफ, GDP Data पर नजर रखने वाले कई लोग इस विवाद को जरूरत से ज्यादा बड़ा मानते हैं। उनका तर्क है कि जब किसी देश में GDP का Base Year बदला जाता है और Data Sources को बेहतर किया जाता है, तो GDP के आंकड़ों और उसके स्तर में बदलाव होना सामान्य बात है।

कुछ Analysts ने तो अलग-अलग Series को मिलाने की कोशिश को “ill-educated” तक बताया है।

दोनों पक्ष सरकार के ही आंकड़ों का इस्तेमाल कर रहे हैं

इस पूरे विवाद की सबसे दिलचस्प बात यह है कि दोनों पक्ष अपने तर्क के लिए सरकार द्वारा जारी आंकड़ों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

सुभाष गर्ग कोई आंकड़ा बना नहीं रहे हैं। वह पुराने प्रकाशित अनुमान और नए आंकड़े लेकर सीधी गणना कर रहे हैं।

वहीं गौरव वल्लभ और MoSPI का कहना है कि यह गणना इसलिए सही नहीं है क्योंकि जिस आधार पर तुलना की जा रही है, उसकी Underlying Measurement Series ही बदल चुकी है।

सैद्धांतिक रूप से जब कोई देश अपनी GDP का Base Year अपडेट करता है और Data Sources को बेहतर बनाता है, तो GDP का स्तर बदल सकता है और कभी-कभी यह बदलाव काफी बड़ा भी हो सकता है।

असल सवाल यह है कि इस बार हुआ बदलाव कितनी स्पष्टता और पारदर्शिता के साथ समझाया गया है, और क्या जमीन पर मौजूद High-Frequency Data—जैसे Consumption, Manufacturing और Jobs—भी Headline Growth Rate के साथ उसी तरह मजबूत तस्वीर पेश करते हैं।

आम लोगों के लिए असली सवाल क्या है?

आम लोगों के लिए इस पूरी बहस का सबसे बड़ा सवाल काफी सीधा है।

क्या भारतीय अर्थव्यवस्था वास्तव में 7 प्रतिशत से ज्यादा की मजबूत दर से बढ़ रही है, या फिर Revisions को हटाकर और पुराने आधार को ध्यान में रखकर देखें तो वास्तविक Momentum काफी कम है?

सुभाष गर्ग का कहना है कि सरकार को आंकड़ों से आगे बढ़कर अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति को पहचानना चाहिए और Reforms पर ध्यान देना चाहिए।

वहीं गौरव वल्लभ का कहना है कि आंकड़े पहले से ही बेहतर तरीके से मापी गई और विस्तार कर रही अर्थव्यवस्था को दर्शाते हैं।

इस पूरे Face-off ने Statistics Ministry को अपनी Methodology को सामान्य से कहीं ज्यादा विस्तार से समझाने के लिए मजबूर किया है। यह अपने आप में एक स्वस्थ बात हो सकती है।

हालांकि, इससे विवाद खत्म होगा या नहीं, यह कहना मुश्किल है।

GDP को लेकर ऐसी बहसें अक्सर लंबे समय तक चलती हैं, खासकर तब जब आधिकारिक Headline Growth और किसी वैकल्पिक गणना के बीच अंतर 7.8 प्रतिशत बनाम 2.6 प्रतिशत जितना बड़ा हो।

आखिर में सवाल GDP के आंकड़ों से आगे का है

अंततः GDP एक Estimate है, जो कई स्तरों के Data, Assumptions और Revisions पर आधारित होता है।

आधार आंकड़े में ₹6 लाख करोड़ का बदलाव इतना बड़ा है कि इससे अर्थव्यवस्था की Recovery या Expansion कितनी मजबूत है, इसकी पूरी Narrative बदल सकती है।

यही वजह है कि सुभाष गर्ग और गौरव वल्लभ के बीच हुई यह बहस इतनी चर्चा में आ गई है।

एक पक्ष का कहना है कि यह Revision तकनीकी और पूरी तरह वैध है।

दूसरे पक्ष का कहना है कि Revision इतना बड़ा है कि इसकी गहरी जांच और ज्यादा पारदर्शिता जरूरी है।

दोनों पक्ष एक साथ पूरी तरह सही नहीं हो सकते। लेकिन इस मुद्दे पर दोनों आवाजों का सामने आना सार्वजनिक बहस के लिए बेहतर है।

स्रोत:

  • India Today की Subhash Garg–Gaurav Vallabh Debate पर रिपोर्ट
  • Ministry of Statistics and Programme Implementation की GDP Revision पर Clarification
  • Indian Express की MoSPI के जवाब पर रिपोर्ट
  • Economic Times की GDP Series Change पर Explanation
  • NDTV और अन्य Channels पर Subhash Chandra Garg के Interviews
  • NewsDrum और Business Today की संबंधित Analysis

@रोहित मनराल

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