‘एक साल सोना न खरीदें, विदेश में शादी न करें’: बढ़ती अर्थव्यवस्था के बीच PM मोदी ने फिर दिया स्वदेशी का संदेश

PM मोदी की स्वदेशी अपील

दुनिया भर में जारी उथल-पुथल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर उस पुराने विचार की ओर लौटे हैं, जो भारत में लंबे समय से लोगों के बीच अपनी जगह बनाए हुए है—पहले अपने घर और अपने देश को मजबूत किया जाए। इस साल मई में हैदराबाद में एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने लोगों से सीधी अपील की। उन्होंने कहा कि अगर संभव हो तो एक साल तक सोना न खरीदें। विदेशों में डेस्टिनेशन वेडिंग न करें। ईंधन की खपत कम करें, जहां संभव हो घर से काम करें, सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें और भारत में बने उत्पादों को अधिक खरीदें।

इस संदेश का असर इसलिए भी खास रहा क्योंकि इसका समय महत्वपूर्ण था। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया था। भारत अपने तेल की बड़ी मात्रा आयात करता है और सोने का भी लगभग पूरा हिस्सा विदेशों से खरीदता है। इन दोनों के भुगतान डॉलर में किए जाते हैं। जब इनका आयात बिल एक साथ बढ़ता है, तो रुपये और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है। मोदी ने इस अपील को सरकार के निर्देश के तौर पर नहीं, बल्कि साझा राष्ट्रीय जिम्मेदारी के रूप में पेश किया।

उन्होंने कहा, “सोने की खरीद एक और ऐसा क्षेत्र है, जहां विदेशी मुद्रा का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। राष्ट्रीय हित में हमें एक साल तक सोना न खरीदने का संकल्प लेना चाहिए।” उन्होंने यह भी बताया कि मध्यमवर्गीय परिवार तेजी से विदेशों में शादियां आयोजित करने लगे हैं, जिससे बड़ी मात्रा में पैसा देश से बाहर जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपनी शादियां भारत में ही आयोजित करने की अपील की। उनका कहना था कि भारत में कई खूबसूरत स्थान हैं और इस तरह पैसा देश के भीतर रहकर स्थानीय कारोबारों को समर्थन देगा।

यह कोई अकेली टिप्पणी नहीं थी। इसी दौरान उन्होंने कई अन्य सुझाव भी दिए थे। इनमें खाना पकाने के तेल का इस्तेमाल कम करना, प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ना, कारपूल करना, मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देना तथा स्वदेशी उत्पादों पर अधिक जोर देना शामिल था। उनकी भाषा परिचित थी। यह आत्मनिर्भरता के उस विचार की याद दिलाती है, जिसे प्रधानमंत्री पहले भी अलग-अलग संकटों के दौरान, खासकर महामारी के वर्षों में, सामने रखते रहे हैं।

इस बार इस स्वदेशी अपील को और धार इसलिए मिली क्योंकि इसके पीछे मजबूत आर्थिक आंकड़ों का आधार भी था। भारत ने मजबूत आर्थिक वृद्धि दर्ज करना जारी रखा है, जबकि कई अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को संघर्ष करना पड़ा है। वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत की वास्तविक GDP वृद्धि 7.8 प्रतिशत रही, जो भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमान से भी अधिक थी। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर ने अच्छा प्रदर्शन किया। निवेश गतिविधियां भी मजबूत बनी रहीं। बाहरी झटकों को झेलने के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था आगे बढ़ती रही।

घरेलू स्तर पर स्थिर आर्थिक वृद्धि और दूसरी तरफ बाहरी दबाव के इस मेल ने मोदी को आर्थिक अनुशासन की बात करने का अवसर दिया। उनका संकेत था कि अर्थव्यवस्था अच्छा प्रदर्शन कर रही है, लेकिन केवल विकास पर्याप्त नहीं है। अगर गैर-जरूरी आयात और विदेशों में होने वाले खर्च के जरिए बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा बाहर जाती रहे, तो इसका असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। ऐसे में आम नागरिक कुछ समय के लिए अपनी आदतों में छोटे बदलाव करके योगदान दे सकते हैं।

हालांकि सोने को लेकर की गई अपील का सांस्कृतिक पक्ष इतना आसान नहीं है। भारतीय शादियों, त्योहारों और परिवारों की बचत में सोने की भूमिका केवल निवेश तक सीमित नहीं है। कई परिवारों के लिए दुल्हन के गहने परंपरा और सामाजिक पहचान का हिस्सा हैं। वहीं, थाईलैंड, दुबई या यूरोप जैसे स्थानों पर डेस्टिनेशन वेडिंग मध्यम वर्ग के एक हिस्से के लिए स्टेटस सिंबल बन चुकी हैं। ऐसे में दोनों चीजों को कुछ समय के लिए रोकने की अपील लोगों से परंपरा और आकांक्षा को अस्थायी रूप से अलग रखने की मांग करती है।

फिर भी, इस अपील पर प्रतिक्रिया उम्मीद से अधिक सकारात्मक दिखाई दी। जून के अंत में अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में मोदी ने लोगों की प्रतिक्रिया के लिए उनका धन्यवाद किया। उन्होंने बताया कि कुछ परिवारों ने उन्हें पत्र लिखकर कहा कि उन्होंने इस साल शादी के लिए नया सोना नहीं खरीदने का फैसला किया है और पुराने गहनों को पिघलाकर उन्हें नए रूप में तैयार करवाएंगे। कुछ अन्य लोगों ने विदेश यात्रा टालने की बात भी कही। मोदी ने कहा कि जब लाखों लोग छोटे-छोटे बदलाव करते हैं, तो उनका सामूहिक प्रभाव बड़ा हो सकता है।

अर्थशास्त्रियों और बाजार पर नजर रखने वालों ने इस अपील के पीछे की आर्थिक वजह को भी समझा। पिछले वित्त वर्ष में सोने का आयात रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था और इसका मूल्य कई अरब डॉलर तक पहुंच गया। दूसरी तरफ तेल का बढ़ता आयात बिल भी दबाव बढ़ा रहा था। ऐसे में चालू खाते और रुपये पर दबाव वास्तविक था। स्वैच्छिक रूप से आयात को नियंत्रित करने से सरकार को कठोर प्रशासनिक उपायों की जरूरत के बिना कुछ राहत मिल सकती थी। प्रधानमंत्री के भाषण के बाद जल्द ही सोने पर आयात शुल्क में बढ़ोतरी भी हुई, जिसने इस संकेत को और मजबूत किया।

पूरे अभियान में स्वदेशी का विचार लगातार दिखाई देता है। स्थानीय स्तर पर खरीदारी करना, स्थानीय स्तर पर समारोह आयोजित करना और देश में ही पैसा खर्च करना—ये सभी भारतीय राजनीतिक भाषणों में नए विचार नहीं हैं। हालांकि इस बार खास बात यह है कि रोजमर्रा के व्यक्तिगत फैसलों को सीधे उस समय की व्यापक आर्थिक स्थिरता से जोड़ने की कोशिश की गई, जब देश की अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत गति से बढ़ रही है। विकास आत्मविश्वास देता है और संयम को उस विकास को बाहरी अस्थिरता से बचाने के एक तरीके के रूप में पेश किया जा रहा है।

आलोचकों का कहना है कि इस तरह की अपील करना आसान है, लेकिन लंबे समय तक लोगों से इसे जारी रखना मुश्किल हो सकता है। सोने की मांग की जड़ें भारतीय संस्कृति में काफी गहरी हैं। डेस्टिनेशन वेडिंग भी रातोंरात खत्म होने वाली नहीं हैं। वहीं, ईंधन की खपत केवल व्यक्तिगत इच्छाशक्ति पर निर्भर नहीं करती, बल्कि देश में उपलब्ध बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक परिवहन की सुविधाओं पर भी निर्भर करती है। फिर भी, प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाया और बाद में लोगों की प्रतिक्रिया का भी उल्लेख किया। इससे यह संकेत मिलता है कि वह अभी भी आर्थिक बदलावों में जनता की भागीदारी को महत्वपूर्ण मानते हैं।

फिलहाल संदेश साफ है। भारत की अर्थव्यवस्था ने अपनी मजबूती दिखाई है। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही के आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं। लेकिन आर्थिक मजबूती अपने आप बनी नहीं रहती। ऐसी दुनिया में, जहां सप्लाई चेन अचानक प्रभावित हो सकती हैं और तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है, सोने, विदेशी यात्रा और आयातित वस्तुओं पर थोड़ी सामूहिक सावधानी को नागरिकों के योगदान के एक व्यावहारिक तरीके के रूप में पेश किया जा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह आदत मौजूदा संकट के आगे भी जारी रहती है या नहीं। इसी से तय होगा कि प्रधानमंत्री मोदी का यह नया स्वदेशी अभियान कितना लंबे समय तक असर छोड़ता है।

स्रोत:

  • India Today — प्रधानमंत्री मोदी के मई 2026 के हैदराबाद और उसके बाद के भाषणों पर रिपोर्ट
  • Hindustan Times, Business Standard और Times of India — सोने और विदेश में शादी/यात्रा से जुड़ी प्रधानमंत्री की अपील पर कवरेज
  • ANI और ‘मन की बात’ — जून 2026 के संबोधन और ट्रांसक्रिप्ट संदर्भ
  • Ministry of Statistics and Programme Implementation — वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के GDP आंकड़े, 31 अगस्त 2026
  • Financial Express, Indian Express और अन्य समकालीन आर्थिक रिपोर्ट

@रोहित मनराल

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