खामेनेई की अंतिम विदाई: भारत का दिल से शुक्रिया, जबकि अमेरिका पर 13 देशों को रोकने का आरोप

ईरान की राजनीति, वैश्विक कूटनीति और देशों के बीच रिश्तों की असली तस्वीर इन दिनों दुनिया के सामने दिखाई दे रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह है ईरान के सर्वोच्च नेता (सुप्रीम लीडर) आयतुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

आयतुल्ला अली खामेनेई, जिन्होंने तीन दशकों से अधिक समय तक ईरान का नेतृत्व किया, फरवरी में अमेरिका और इज़राइल के हवाई हमलों के दौरान मारे गए थे। अब महीनों बाद तेहरान में उनके सम्मान में कई दिनों तक चलने वाले राजकीय अंतिम संस्कार का आयोजन किया जा रहा है।

खामेनेई की अंतिम विदाई

तेहरान की सड़कों पर लाखों लोग अपने नेता को अंतिम विदाई देने के लिए उमड़ पड़े हैं। लोग सीना पीटते हुए शोक व्यक्त कर रहे हैं, हाथों में खामेनेई की तस्वीरें लिए नारे लगा रहे हैं। अंतिम यात्रा कई शहरों से होकर गुज़र रही है और इराक के कुछ हिस्सों के बाद 9 जुलाई को मशहद में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। इसे हालिया युद्ध के बाद ईरान की एकता और मजबूती के प्रतीक के रूप में भी देखा जा रहा है।

इसी बीच एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। ईरान ने सार्वजनिक रूप से भारत का आभार व्यक्त किया है। नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास ने एक आधिकारिक संदेश जारी करते हुए कहा कि भारत की उपस्थिति “दोस्ती, एकजुटता और सम्मान का गहरा प्रतीक” है। दूतावास ने कहा कि ईरान की जनता इस सम्मान को कभी नहीं भूलेगी।

हालाँकि भारत की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल नहीं हुए, लेकिन भारतीय प्रतिनिधिमंडल में उप विदेश मंत्री स्तर के प्रतिनिधि, बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन तथा कुछ विपक्षी नेता मौजूद रहे। ईरान ने इस बात की विशेष सराहना की कि जब कई देशों ने दूरी बनाई, तब भारत ने अपने रिश्तों को प्राथमिकता दी।

दूसरी ओर, ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम न्यूज़ ने दावा किया है कि अमेरिका ने कई देशों पर अंतिम संस्कार में शामिल न होने के लिए भारी कूटनीतिक दबाव बनाया। रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम 13 देशों ने अपने प्रतिनिधिमंडल का स्तर घटा दिया, कार्यक्रम से दूरी बना ली या पूरी तरह शामिल नहीं हुए।

इन देशों में पूर्वी यूरोप, अफ्रीका, खाड़ी क्षेत्र और पूर्वी एशिया के कुछ देश शामिल बताए जा रहे हैं। ईरानी मीडिया का आरोप है कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और अमेरिकी राजनयिकों ने कई सरकारों से संपर्क कर यह संदेश दिया कि तेहरान में अंतिम संस्कार में शामिल होना अमेरिका के साथ संबंधों के लिए “अमित्रतापूर्ण कदम” माना जा सकता है, जिसके परिणाम भी हो सकते हैं।

हालाँकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिका की ओर से भी इस संबंध में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

यदि अंतरराष्ट्रीय राजनीति को समझें तो तस्वीर पूरी तरह काली या सफेद नहीं है। अमेरिका और ईरान के बीच वर्षों से परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर गंभीर मतभेद रहे हैं। हालिया युद्ध के बाद दोनों देशों के संबंध और अधिक तनावपूर्ण हो गए हैं। ऐसे में वॉशिंगटन शायद नहीं चाहता था कि अंतिम संस्कार में बड़ी अंतरराष्ट्रीय भागीदारी से ईरानी नेतृत्व को वैश्विक वैधता मिले।

इसके बावजूद ईरान पूरी तरह अकेला नहीं दिखा। रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 70 से 100 देशों ने किसी न किसी स्तर पर अपने प्रतिनिधि भेजे। इनमें रूस, चीन, पाकिस्तान, इराक, आर्मेनिया सहित कई अन्य देशों के प्रतिनिधिमंडल शामिल रहे। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि आज की दुनिया कई अलग-अलग रणनीतिक गुटों में बंटी हुई है।

सामान्य लोगों के लिए यह केवल राजनीतिक घटना नहीं है। खामेनेई की मृत्यु और उसके बाद आयोजित यह अंतिम संस्कार उस युद्ध की याद भी दिलाता है जिसमें दोनों पक्षों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। तेहरान की सड़कों पर उमड़ी भीड़ में शोक के साथ-साथ अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ गुस्सा भी साफ दिखाई दिया। कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन, नारेबाज़ी और झंडे जलाने जैसी घटनाएँ भी देखने को मिलीं।

इन सबके बीच भारत की भूमिका सबसे अलग नज़र आई। भारत ने बिना किसी बड़े राजनीतिक प्रदर्शन के अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और यह संदेश दिया कि कठिन समय में भी रिश्तों का सम्मान किया जाना चाहिए। ईरान द्वारा भारत को दिया गया विशेष धन्यवाद दोनों देशों के पुराने और मजबूत संबंधों को दर्शाता है।

हालाँकि यह भी ध्यान रखना ज़रूरी है कि अमेरिकी दबाव को लेकर किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। इसलिए इस पूरे घटनाक्रम को अलग-अलग देशों और मीडिया संस्थानों के दृष्टिकोण से देखना आवश्यक है।

स्रोत:

  • – India Today – ईरान द्वारा भारत का आभार व्यक्त करने, अंतिम संस्कार में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी तथा अमेरिका द्वारा कथित कूटनीतिक दबाव से जुड़ी रिपोर्ट।
  • – The Times of India – भारत की उपस्थिति पर ईरान की प्रतिक्रिया और दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों से संबंधित रिपोर्ट।
  • – Business Today – खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत की भागीदारी पर ईरान के आधिकारिक धन्यवाद संबंधी रिपोर्ट।
  • – Reuters – अंतिम संस्कार, ईरान में शोक समारोह, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों की मौजूदगी और युद्ध के बाद की परिस्थितियों पर रिपोर्ट।
  • – Associated Press (AP News) – आयतुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार, जनसैलाब और आधिकारिक कार्यक्रमों का विवरण।
  • – The Guardian – तेहरान में अंतिम यात्रा, लाखों लोगों की मौजूदगी और समारोह से जुड़े घटनाक्रम की रिपोर्ट।
  • – Tehran Times, Firstpost, NDTV, The Indian Express और Financial Express की संबंधित रिपोर्टों एवं उपलब्ध मीडिया कवरेज का भी संदर्भ लिया गया।

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