
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली की थी। इसके दो दिन बाद, स्थानीय लोगों के एक समूह श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास से जुड़े कुछ लोग वहां पहुंचे। उन्होंने मैदान की सफाई की। उनका कहना था कि वहां कूड़ा-कचरा और शराब की बोतलें पड़ी थीं। इसके बाद उन्होंने हवन किया, जिसे उन्होंने शुद्धिकरण बताया।
कांग्रेस नेताओं ने तुरंत आरोप लगाया कि यह सब इसलिए किया गया क्योंकि मल्लिकार्जुन खड़गे दलित हैं। कांग्रेस ने इस पूरे मामले को छुआछूत करार दिया। यह मुद्दा संसद तक भी पहुंच गया।
इसके बाद 29 अगस्त को राहुल गांधी ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और इस मुद्दे पर खुलकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि हल्द्वानी में जो हुआ, वह शुद्धिकरण नहीं बल्कि छुआछूत थी। राहुल गांधी ने इसे संविधान के तहत अपराध बताया और आरोप लगाया कि बीजेपी-आरएसएस से जुड़े लोग आज भी ऐसी प्रथा का पालन करते हैं।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से मांग की कि वह खुद आदेश देकर हवन करने वाले लोगों के खिलाफ SC/ST Act के तहत FIR दर्ज करवाएं। उन्होंने इस दौरान उत्तराखंड बीजेपी अध्यक्ष का एक वीडियो भी चलाया, जिसमें मैदान को नारों से “अपवित्र” किए जाने की बात कही गई थी।
लेकिन इसके ठीक एक दिन बाद पूरा मामला ही पलट गया।
30 अगस्त की रात हल्द्वानी पुलिस ने राहुल गांधी के खिलाफ ही FIR दर्ज कर ली। शिकायतकर्ता 26 वर्षीय अमित कुमार हैं, जो वाल्मीकि समुदाय से आते हैं। वह सफाई और हवन में शामिल लोगों में से एक थे।
अमित कुमार का कहना है कि उन्होंने और अन्य अनुसूचित जाति के लोगों ने भी इस सफाई और हवन में हिस्सा लिया था। उनके मुताबिक, इस पूरी घटना का किसी की जाति से कोई लेना-देना नहीं था। कुमार का आरोप है कि राहुल गांधी ने बिना पूरी जानकारी हासिल किए इस पूरे कार्यक्रम को छुआछूत और दलित विरोधी बता दिया।
उनका कहना है कि राहुल गांधी के इन बयानों से समुदाय की भावनाएं आहत हुईं और हवन में शामिल लोगों को जातिवादी बताकर उनकी छवि खराब की गई।
पुलिस ने राहुल गांधी के खिलाफ अलग-अलग समुदायों के बीच दुश्मनी बढ़ाने, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और SC/ST Act के तहत धाराओं में मामला दर्ज किया है। मामले की जांच शुरू हो गई है।
हवन कराने वालों का क्या कहना है?
हवन आयोजित करने वाले लोग अब भी अपनी बात पर कायम हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस की बड़ी रैली के बाद मैदान गंदा हो गया था। उन्होंने पहले वहां सफाई की और फिर हवन किया।
उनका कहना है कि रामलीला और दूसरे धार्मिक आयोजनों के लिए इस्तेमाल होने वाली जगह पर सफाई के बाद इस तरह का धार्मिक अनुष्ठान करना सामान्य प्रक्रिया है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी कहा है कि हवन करने वाले लोग बीजेपी कार्यकर्ता नहीं थे और इस घटना को जाति का रंग देना जरूरी नहीं है।
वहीं, राज्य के एक दलित केंद्रीय मंत्री ने भी राहुल गांधी से कहा कि इस तरह उत्तराखंड को बदनाम नहीं किया जाना चाहिए।
राहुल ने FIR की मांग की थी, खुद पर दर्ज हो गई FIR
इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ यही है कि राहुल गांधी ने जिन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की थी, उसी विवाद को लेकर अब FIR राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज हो गई है।
एक तरफ कांग्रेस का कहना है कि हवन का आयोजन जानबूझकर एक दलित नेता के अपमान के लिए किया गया और इसे छुआछूत के रूप में देखा जाना चाहिए।
दूसरी तरफ हवन कराने वाले लोगों का कहना है कि यह एक सामान्य सफाई और धार्मिक अनुष्ठान था, जिसे अब राजनीतिक फायदे के लिए जाति का मुद्दा बनाया जा रहा है।
दोनों पक्ष संविधान और न्याय की बात कर रहे हैं। दोनों एक-दूसरे पर लोगों की भावनाओं के साथ राजनीति करने का आरोप लगा रहे हैं।
आम लोगों के लिए यह मामला एक बार फिर यही सवाल खड़ा करता है कि किस तरह कोई सामान्य घटना बहुत तेजी से जाति और विचारधारा की राजनीतिक लड़ाई में बदल जाती है।
एक मैदान की सफाई हुई, हवन किया गया, दिल्ली में बयान दिए गए और देखते ही देखते FIR तक पहुंच गई बात।
अब इस मामले में जांच आगे बढ़ेगी, दोनों पक्षों की ओर से बयान आते रहेंगे और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी जारी रहने की संभावना है।
लेकिन फिलहाल पूरा मामला यही है—राहुल गांधी ने हल्द्वानी के हवन को ‘छुआछूत’ बताया और अब उन्हीं बयानों को लेकर उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
स्रोत: The Hindu, The Indian Express, Hindustan Times, India Today, ANI, The Statesman और Times of India की 29–31 अगस्त 2026 की रिपोर्ट्स।
@रोहित मनराल