BJP के संगठनात्मक फेरबदल के बाद मोदी 3.0 कैबिनेट में भी फेरबदल की तैयारी, 12 पद खाली; दावेदारों की लंबी सूची

मोदी 3.0 कैबिनेट फेरबदल

बीजेपी में नितिन नबीन के नेतृत्व में बड़ा संगठनात्मक बदलाव पूरा हो चुका है। स्मृति ईरानी की महासचिव के रूप में वापसी हुई है, राम माधव को फिर से उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है, जबकि पीयूष गोयल को पार्टी का नया कोषाध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा कई युवा चेहरों और महिलाओं को संगठन में अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं। अब दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में चर्चा अगले संभावित कदम की है—केंद्र की मोदी 3.0 सरकार में कैबिनेट फेरबदल।

फिलहाल प्रधानमंत्री समेत केंद्रीय मंत्रिपरिषद में 69 सदस्य हैं। संविधान के मुताबिक इसमें अधिकतम 81 सदस्य हो सकते हैं। यानी 12 पद अभी खाली हैं। सूत्रों के मुताबिक सरकार इन खाली पदों को भरने पर विचार कर रही है। इसका मकसद केवल आने वाले कुछ महीनों की जरूरतें पूरी करना नहीं है, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनाव और उससे पहले होने वाले विधानसभा चुनावों को भी ध्यान में रखा जा रहा है। इनमें खास तौर पर अगले साल की शुरुआत में होने वाले उत्तर प्रदेश और साल के अंत में होने वाले गुजरात विधानसभा चुनाव महत्वपूर्ण हैं।

मोदी 3.0 कैबिनेट फेरबदल

कुछ नेताओं की सरकार से विदाई पहले ही हो चुकी है। पेपर लीक को लेकर हुए विरोध के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री का पद छोड़ा। जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू के राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्होंने भी सरकार से विदाई ली। आने वाले समय में कुछ और बदलाव की संभावना जताई जा रही है।

बीजेपी लंबे समय से ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के सिद्धांत को प्राथमिकता देती रही है। हर्ष मल्होत्रा अब दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष हैं, जबकि पंकज चौधरी उत्तर प्रदेश बीजेपी की कमान संभाल रहे हैं। दोनों केंद्र में राज्य मंत्री भी हैं। वहीं पीयूष गोयल वाणिज्य मंत्री बने रहने के साथ पार्टी के कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने के बाद अक्सर नेताओं के सरकारी पदों में बदलाव देखने को मिलता है।

हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा के राज्यसभा कार्यकाल भी नवंबर में समाप्त हो रहे हैं। ऐसे में उनके भविष्य पर भी नजर बनी हुई है। इसके साथ ही मंत्रियों के प्रदर्शन को भी संभावित फेरबदल में एक महत्वपूर्ण कारक माना जा रहा है।

उम्र और अनुभव भी बनेगा बड़ा आधार

मोदी 3.0 सरकार के गठन के समय 2024 में ज्यादातर मंत्री 51 से 70 वर्ष की उम्र के बीच थे। अब कम से कम एक दर्जन कैबिनेट मंत्री और स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री 70 वर्ष की उम्र पार कर चुके हैं।

जितन राम मांझी 81 वर्ष के हैं, जबकि केंद्रीय मंत्रिपरिषद में सबसे युवा चेहरा अभी भी 38 वर्षीय के. राम मोहन नायडू हैं।

सूत्रों के मुताबिक संभावित फेरबदल में युवा चेहरों और महिलाओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने पर भी जोर हो सकता है।

राज्यों के हिसाब से भी तय होगा समीकरण

कैबिनेट फेरबदल में क्षेत्रीय और चुनावी समीकरण भी अहम भूमिका निभा सकते हैं। कांग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक से नए प्रतिनिधित्व की चर्चा है। इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र भी बीजेपी के रणनीतिक फोकस में हैं।

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए राज्य को खास महत्व मिलने की संभावना है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात को भी नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

सहयोगियों और हाल में बीजेपी के साथ आए नेताओं पर भी नजर

संभावित फेरबदल में एनडीए सहयोगियों और हाल में बीजेपी के साथ आए नेताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे की शिवसेना के पास अब 13 सांसद हैं। उनके बेटे श्रीकांत शिंदे का नाम संभावित मंत्री पद के लिए चर्चा में है।

पंजाब में आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए सात राज्यसभा सांसदों के समूह को लेकर भी चर्चा चल रही है। इस समूह से संदीप पाठक को पहले ही पार्टी में सचिव की जिम्मेदारी मिल चुकी है।

इसके अलावा शिरोमणि अकाली दल की एनडीए में वापसी को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं। हरसिमरत कौर बादल पहले मोदी सरकार में मंत्री रह चुकी हैं। उन्होंने कृषि कानूनों के विरोध में मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। अगर अकाली दल दोबारा एनडीए का हिस्सा बनता है तो हरसिमरत कौर बादल या पार्टी के किसी अन्य नेता को फिर से केंद्रीय जिम्मेदारी मिलने की संभावना पर चर्चा हो सकती है।

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के कुछ सांसदों के एक छोटे दल में जाने और एनडीए के समर्थन में आने के बाद उन्हें भी राजनीतिक रूप से समायोजित किए जाने की चर्चा है।

तमिलनाडु में डीएमके और महाराष्ट्र में एनसीपी को लेकर भी संभावित राजनीतिक समीकरणों पर नजर रखी जा रही है। अगर दोनों धड़ों के बीच नजदीकी बढ़ती है, तो महाराष्ट्र में एनसीपी को बड़ी भूमिका मिलने की संभावना पर भी विचार हो सकता है। हालांकि अभी इनमें से किसी भी बदलाव को अंतिम नहीं माना जा रहा है।

कई बड़े मंत्रियों के पास एक से ज्यादा मंत्रालय

फिलहाल केंद्र सरकार में 14 मंत्री ऐसे हैं जिनके पास एक से ज्यादा मंत्रालय या विभाग हैं। गृह मंत्री अमित शाह के पास गृह मंत्रालय के साथ सहकारिता मंत्रालय भी है।

जेपी नड्डा स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय संभाल रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान के पास कृषि एवं किसान कल्याण के साथ ग्रामीण विकास मंत्रालय है।

अश्विनी वैष्णव रेल मंत्रालय के अलावा सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय भी संभाल रहे हैं।

संभावित फेरबदल में इन अतिरिक्त जिम्मेदारियों का बोझ कम करने और अलग-अलग मंत्रालयों के लिए नए चेहरों को जिम्मेदारी देने का रास्ता भी खुल सकता है।

2029 की तैयारी से जुड़ा बड़ा फैसला

बीजेपी की तरफ से फिलहाल कैबिनेट फेरबदल को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। पार्टी आमतौर पर अंतिम फैसला होने से पहले ऐसी चर्चाओं पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं करती।

हालांकि राजनीतिक घटनाक्रम का पैटर्न साफ है—पहले संगठन में बदलाव और उसके बाद सरकार में संभावित फेरबदल। एक व्यक्ति, एक जिम्मेदारी, नेताओं का प्रदर्शन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, चुनावी समीकरण, युवा चेहरे और महिलाओं की भागीदारी जैसे कई पहलुओं को एक साथ देखा जा रहा है।

अभी कुछ भी अंतिम नहीं है और फेरबदल की समयसीमा भी तय नहीं मानी जा रही। लेकिन 12 खाली मंत्री पद मौजूद हैं, चुनावी कैलेंडर तेजी से आगे बढ़ रहा है और संभावित दावेदारों के नामों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो चुकी है।

जब भी यह फेरबदल होगा, उसका असर केवल तत्कालीन सरकारी जरूरतों तक सीमित नहीं रहेगा। इसके पीछे 2029 के लोकसभा चुनाव की लंबी राजनीतिक रणनीति और उससे पहले होने वाले विधानसभा चुनावों का गणित भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

स्रोत: 25 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में सूत्रों से बातचीत के आधार पर NDTV की रिपोर्ट; नितिन नबीन के नेतृत्व में बीजेपी के संगठनात्मक बदलाव को लेकर The Week, Hindustan Times और अन्य मीडिया संस्थानों की पूर्व रिपोर्टिंग।

@रोहित मनराल

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