‘दुनिया भारत को विकास और उम्मीद की उजली किरण के रूप में देख रही है’: आर्थिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम 2026 में PM मोदी

भारत विकास और उम्मीद की उजली किरण

राजधानी दिल्ली में आयोजित इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम 2026 की शाम उस समय खास बन गई, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और आर्थिक संभावनाओं पर बात की। ताज पैलेस में आयोजित इस कार्यक्रम में बिजनेस लीडर्स, निवेशक और नीति-निर्माता मौजूद थे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत को विकास और उम्मीद की उजली किरण (Bright Spot of Growth and Hope) के रूप में देख रही है।

प्रधानमंत्री ने अपनी बात की शुरुआत पिछले कुछ वर्षों में दुनिया के सामने आई चुनौतियों से की। उन्होंने कहा कि दुनिया में तेजी से बदलाव हो रहे हैं और किसी भी देश का भविष्य अब दूसरे देशों से अलग नहीं रह सकता। उन्होंने कहा, “चाहे कोई इसे पसंद करे या नहीं, सभी देशों का भविष्य एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। कुछ भी अलग-थलग रहकर संभव नहीं है।”

प्रधानमंत्री ने भारत की G20 अध्यक्षता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ने G20 के दौरान “One Earth, One Family, One Future” का संदेश दिया था और आज की सदी की कई समस्याओं का समाधान इसी भावना में छिपा हुआ है।

हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां आसान नहीं हैं। संसाधनों का इस्तेमाल हथियारों की तरह किया जा रहा है, देशों के बीच अविश्वास बढ़ रहा है और वैश्विक आर्थिक विकास को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसके बावजूद प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया की नजर भारत पर बनी हुई है।

उन्होंने कहा, “ऐसे समय में भी दुनिया भारत को विकास और उम्मीद की उजली किरण के रूप में देखती है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दावे के समर्थन में भारत की आर्थिक और सामाजिक प्रगति के आंकड़ों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले 10 से 12 वर्षों में लगभग 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि IMF लगातार इस बात की ओर इशारा करता रहा है कि भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से दिए गए अपने संबोधन का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने भारत की विकास यात्रा के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों की ओर भी ध्यान दिलाया। इनमें मैन्युफैक्चरिंग, कृषि और फूड प्रोसेसिंग, टेक्नोलॉजी, ग्रीन इकोनॉमी और ब्लू इकोनॉमी जैसे क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में देश की ऊर्जा और संसाधनों को इन क्षेत्रों में केंद्रित किया जा रहा है।

लाइसेंस राज से भरोसे की अर्थव्यवस्था तक

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में भारत में हुए नियामकीय सुधारों का भी जिक्र किया। उन्होंने पुराने लाइसेंस-राज के दौर की व्यवस्था का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय यदि कोई कंपनी तय सीमा से अधिक उत्पादन करती थी तो उसे भी दंडित किया जाता था।

उन्होंने इस मॉडल को PLP यानी Production Linked Punishment बताया।

PM मोदी: दुनिया भारत को विकास और उम्मीद की उजली किरण मान रही

इसके विपरीत आज सरकार की सोच बदल गई है। प्रधानमंत्री के अनुसार अब अधिक उत्पादन करने वाली कंपनियों को प्रोत्साहन दिया जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल कुछ नियमों में बदलाव नहीं कर रही, बल्कि नियमों और नियमन को देखने के पूरे नजरिए को बदलने की कोशिश की जा रही है।

प्रधानमंत्री ने पुराने और नए प्रशासनिक दृष्टिकोण के बीच अंतर बताते हुए कहा कि पहले सोच थी “prohibited unless permitted”, यानी अनुमति मिलने तक चीजों को प्रतिबंधित समझना। वहीं अब सोच “permitted unless prohibited” की होनी चाहिए।

इसका मतलब है कि अगर किसी काम पर कानून के तहत स्पष्ट रूप से रोक नहीं है, तो हर कदम पर अनुमति लेने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार और जनता के बीच संबंध संदेह नहीं बल्कि विश्वास पर आधारित होने चाहिए।

उन्होंने कहा कि मौजूदा नीतियों को प्रो-पीपल, प्रो-ग्रोथ और प्रो-डेवलपमेंट बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

रोजमर्रा की जिंदगी में दिख रहे बदलाव

प्रधानमंत्री ने ऐसे बदलावों का भी उल्लेख किया जिन्हें आम लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में महसूस कर सकते हैं। उन्होंने सस्ता डेटा, 5G के तेजी से विस्तार, रेलवे में बदलाव, दिल्ली मेट्रो और नमो रैपिड रेल जैसे उदाहरण दिए।

उन्होंने संकेत दिया कि कागज पर दिखाई देने वाले छोटे-छोटे सुधार भी मिलकर देश में बड़े बदलाव ला सकते हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि राजनीतिक स्थिरता और नीतियों की निरंतरता भारत के प्रति वैश्विक निवेशकों और अन्य देशों के विश्वास को मजबूत करती है।

उनके अनुसार दुनिया को यह भरोसा मिलता है कि भारत जिस दिशा में आगे बढ़ रहा है, उसमें अचानक बड़ा बदलाव नहीं आएगा।

वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत पर भरोसा

PM मोदी ने Economic Times World Leaders Forum 2026 में कहा कि दुनिया भारत को विकास और उम्मीद की उजली किरण के रूप में देख रही है।

प्रधानमंत्री ने यह दावा नहीं किया कि भारत वैश्विक दबावों से पूरी तरह अलग है। उन्होंने स्वीकार किया कि दुनिया में मौजूद आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों का असर भारत पर भी पड़ सकता है। लेकिन उनका जोर इस बात पर रहा कि भारत ने निरंतर सुधार और विकास का रास्ता चुना है और इसके परिणाम भी दिखाई दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि विकास की गति को बनाए रखने के साथ-साथ आने वाले वर्षों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का नजरिया अब नियंत्रण से ज्यादा सक्षम बनाने (Enablement) की ओर बढ़ रहा है।

फोरम में दुनिया भर के प्रमुख चेहरे मौजूद

इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम 2026 में बिजनेस और नीति जगत के कई प्रमुख चेहरे शामिल हुए। दो दिनों के कार्यक्रम में 40 से अधिक वैश्विक वक्ताओं और 300 से ज्यादा भारतीय CEOs के शामिल होने की उम्मीद थी।

इससे पहले कार्यक्रम में टाइम्स इंटरनेट के चेयरमैन सत्यन गजवानी ने भी ऐसे समय में प्रधानमंत्री मोदी को स्थिरता के स्रोत के रूप में बताया था, जब दुनिया लगातार एक के बाद एक संकटों का सामना कर रही है।

प्रधानमंत्री के संबोधन में भी इसी विचार की झलक दिखाई दी। उन्होंने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक दिशा, सुधारों और विकास की संभावनाओं पर भरोसा जताया।

इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम शनिवार तक जारी रहेगा, जिसमें टेक्नोलॉजी, जियोपॉलिटिक्स और विकास के अगले चरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी।

लेकिन शुक्रवार शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का सबसे प्रमुख संदेश स्पष्ट रहा—वैश्विक चुनौतियों और अनिश्चितताओं के बीच दुनिया भारत को विकास और उम्मीद की उजली किरण के रूप में देख रही है।

स्रोत: Times of India, Economic Times, ANI, ETV Bharat, New Kerala, The News Mill, Awaz The Voice, Akashvani News और प्रधानमंत्री के आधिकारिक संबोधन का पाठ (21 अगस्त 2026)।

@रोहित मनराल

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top