
सच कहें तो कुछ लोग कभी अपना अंदाज नहीं छोड़ते। शहजाद पूनावाला भी उन्हीं में से एक हैं।
शहजाद पूनावाला ने कई सालों तक BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर काम किया। वह लगभग हर बड़े टीवी डिबेट में पार्टी का पक्ष रखते और विपक्ष पर तीखे हमले करते नजर आते थे। लेकिन कुछ दिन पहले उन्होंने BJP से इस्तीफा दे दिया। इसके मुश्किल से 48 घंटे बाद ही वह X पर फिर सक्रिय नजर आए—अपने पुराने अंदाज में तंज कसते हुए, शब्दों का खेल खेलते हुए और इस तरह निशाना साधते हुए कि वह अब भी नरेंद्र मोदी के समर्थक ही नजर आते हैं।
बुधवार को उन्होंने अपने पुराने टीवी क्लिप्स का एक वीडियो शेयर किया और ऐसा पोस्ट लिखा, जिसने काफी लोगों का ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि वह हमेशा राजीव गांधी के आभारी रहेंगे। वजह? उनके मुताबिक, राजीव गांधी ने भारत को राहुल गांधी दिए और राहुल गांधी ही वह वजह हैं, जिसके चलते नरेंद्र मोदी 2014, 2019 और 2024 में प्रधानमंत्री बने और 2029 में भी फिर प्रधानमंत्री बनेंगे।
उन्होंने लिखा, “Forever indebted to Shri Rajiv Gandhi ji. He gave us @RahulGandhi who ensured PM @narendramodi became PM in 2014, 19, 24 and will become PM again in 2029. Inshallah. Rajiv Gandhi is therefore the biggest Modi ji supporter like me.”
यानी शहजाद का तंज कुछ ऐसा था—राजीव गांधी ने हमें ऐसा ‘मोदी समर्थक’ दे दिया, जिसने नरेंद्र मोदी को बार-बार प्रधानमंत्री बनाने में मदद की। उनके पोस्ट में वही पुराना व्यंग्य और राजनीतिक कटाक्ष साफ दिखाई दिया।
लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई।
एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में “दिमागी नक्सल” शब्द का इस्तेमाल किया था। उन्होंने ऐसे लोगों की बात की थी, जिनके भीतर नक्सली सोच बनी हुई है और जो सशस्त्र नक्सलवाद पर काफी हद तक काबू पाने के बावजूद देश में परेशानी पैदा करने की कोशिश करते हैं।
इस पर शहजाद पूनावाला ने जवाब देते हुए लिखा, “Modi is absolutely wrong to categorise folks as DIMAGI NAXAL. They should have been called बददिमगी Naxal.”
यानी उनका कहना था कि इन्हें ‘दिमागी नक्सल’ नहीं, बल्कि ‘बददिमागी नक्सल’ कहा जाना चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने राहुल गांधी को लेकर अपने पुराने अंदाज में ‘पप्पू’ वाला तंज भी दोहराया और कहा कि राहुल गांधी पप्पू थे, हैं और हमेशा पप्पू ही रहेंगे।
आखिर शहजाद पूनावाला ने BJP क्यों छोड़ी?
शहजाद पूनावाला के इस्तीफे की बात करें तो उन्होंने जुलाई के आखिर में ही पार्टी को पत्र लिखकर बताया था कि वह आर्थिक और निजी कारणों से इस्तीफा देना चाहते हैं। BJP की ओर से उन्हें अपने फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा गया था।
इसके बाद 17 अगस्त को उन्होंने एक बार फिर पत्र लिखकर अपना इस्तीफा स्वीकार करने का अनुरोध किया।
अपने इस्तीफे में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, नितिन नबीन, बीएल संतोष समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का धन्यवाद किया। उन्होंने साफ किया कि वह ‘व्यवस्था’ छोड़ रहे हैं, ‘व्यक्ति’ या ‘विचार’ नहीं।
सरल शब्दों में कहें तो उनका कहना था कि वह संगठनात्मक व्यवस्था से अलग हो रहे हैं, लेकिन BJP की विचारधारा और नरेंद्र मोदी के प्रति उनकी निष्ठा बनी रहेगी।
शहजाद ने यह भी कहा है कि वह काफी समय से अपने राजनीतिक करियर से बाहर निकलने की योजना बना रहे थे और 2024 से ही इस बारे में सोच रहे थे। उनके मुताबिक, प्रवक्ता की भूमिका एक पूर्णकालिक लेकिन बिना वेतन वाली जिम्मेदारी बन गई थी, जबकि निजी जिंदगी में आर्थिक जरूरतें और खर्च भी थे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह कांग्रेस में वापस जाने की योजना नहीं बना रहे हैं। यहां तक कि उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि कांग्रेस में वापसी पर तभी विचार करेंगे, जब सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को हटा दिया जाए और कोई नेहरू को लेकर उनसे माफी मांगे।
यानी उनके इस बयान का सीधा संकेत यही था कि कांग्रेस में वापसी फिलहाल उनके एजेंडे में नहीं है।
BJP से बाहर आने के बाद बदला क्या?

शहजाद पूनावाला के मामले में सबसे दिलचस्प बात यह है कि अब उनके पास पार्टी प्रवक्ता के तौर पर किसी आधिकारिक लाइन का पालन करने की बाध्यता नहीं है।
BJP के आधिकारिक प्रवक्ता रहते हुए उन्हें पार्टी की तय राजनीतिक लाइन के भीतर रहकर अपनी बात रखनी होती थी। लेकिन अब वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किसी बयान पर अपनी असहमति भी सार्वजनिक रूप से जाहिर कर सकते हैं और उसी पोस्ट में राहुल गांधी पर तंज भी कस सकते हैं।
यही वजह है कि उनके हालिया पोस्ट उनके पुराने अंदाज की याद दिलाते हैं—एक तरफ विपक्ष पर तीखा हमला और दूसरी तरफ मोदी के प्रति समर्थन।
जो लोग शहजाद को लंबे समय से देखते आए हैं, उनके लिए यह शैली नई नहीं है। उनका व्यंग्य, शब्दों का खेल और राजनीतिक कटाक्ष उनकी पहचान रहे हैं।
शहजाद पूनावाला ने 2017 में BJP का दामन थामा था। वह खुद को एक युवा पासमांदा मुस्लिम और गैर-वंशवादी राजनीतिक आवाज के तौर पर पेश करते रहे हैं। BJP में रहते हुए वह राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद तक पहुंचे।
वह कई बार यह भी कह चुके हैं कि BJP ने उन्हें वह मंच दिया, जो शायद कोई दूसरी पार्टी उन्हें नहीं देती।
पार्टी छोड़ने के बाद भी नरेंद्र मोदी और BJP की विचारधारा के प्रति उनकी सार्वजनिक प्रशंसा पूरी तरह खत्म होती नहीं दिख रही है।
अब आगे क्या करेंगे शहजाद?
शहजाद पूनावाला ने संकेत दिया है कि वह अब निजी क्षेत्र में काम करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा है कि नरेंद्र मोदी के विजन का समर्थन वह अपने तरीके से करते रहेंगे।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि BJP से बाहर आने के बाद उनकी राजनीति कितनी बदलती है। क्या वह अपेक्षाकृत शांत भूमिका में नजर आएंगे या फिर X पर इसी तरह लगातार तीखे राजनीतिक पोस्ट करते रहेंगे?
फिलहाल उनके हालिया पोस्ट से इतना जरूर साफ है कि BJP का पद छोड़ने के बावजूद उनका राजनीतिक अंदाज नहीं बदला है।
बैज चला गया है।
लेकिन माइक्रोफोन अभी भी ऑन है।
स्रोत: Hindustan Times की शहजाद पूनावाला के 19 अगस्त के पोस्ट और इस्तीफा पत्र पर रिपोर्ट; Live Hindustan और Navbharat Times की सोशल मीडिया टिप्पणियों पर रिपोर्ट; India Today, The Print और Moneycontrol की इस्तीफे की प्रक्रिया तथा ‘व्यवस्था, व्यक्ति नहीं विचार’ वाले बयान पर रिपोर्ट; प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में ‘दिमागी नक्सल’ वाले संदर्भ पर प्रकाशित विभिन्न रिपोर्ट्स।
@रोहित मनराल