
महाराष्ट्र की लगातार बदलती राजनीति में, जहां पारिवारिक रिश्ते और राजनीतिक समीकरण कई बार एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं, प्रशांत किशोर का नाम एक बार फिर चर्चा में है। राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने और जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर ने हाल ही में सुनेत्रा पवार और उनके बेटे, सांसद पार्थ पवार से लंबी मुलाकात की। यह बैठक दक्षिण मुंबई स्थित सुनेत्रा पवार के आधिकारिक आवास ‘देवगिरी’ में हुई और कई घंटे चली।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, बैठक में संगठन को मजबूत करने और सरकार की योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के तरीकों पर चर्चा हुई।
इस बैठक का समय भी राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। किशोर ने हाल ही में बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार को हराकर एक उल्लेखनीय जीत दर्ज की थी। बांकीपुर सीट का संबंध भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से भी रहा है। भाजपा की मजबूत चुनावी मशीनरी के खिलाफ मिली इस जीत ने सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाले NCP गुट के साथ किशोर की मुलाकात को और अधिक चर्चा में ला दिया।
राजनीतिक हलकों में कुछ लोगों ने इसे इस संकेत के तौर पर देखा कि इस साल की शुरुआत में अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक स्थिति को मजबूत करने में जुटा सत्तारूढ़ NCP गुट नई रणनीतिक सलाह की तलाश कर सकता है।
सुप्रिया सुले ने कहा- यह उनका आंतरिक मामला है
शनिवार को पत्रकारों ने जब इस मुलाकात को लेकर NCP (शरदचंद्र पवार) गुट की कार्यकारी अध्यक्ष और बारामती से मौजूदा सांसद सुप्रिया सुले से सवाल किया, तो उन्होंने बेहद संतुलित और व्यक्तिगत अंदाज में जवाब दिया।
सुले ने कहा कि प्रशांत किशोर कई वर्षों से उनके अच्छे व्यक्तिगत मित्र हैं। उन्होंने कहा कि वह किशोर के काम को करीब से देखती रही हैं और उन्होंने कभी भी अपनी दोस्ती को छिपाया नहीं है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशांत किशोर अपने पेशेवर जीवन में अपने फैसले खुद लेते हैं और अपनी पसंद के लोगों तथा राजनीतिक संगठनों के साथ काम करने के लिए स्वतंत्र हैं।
इसके बाद उन्होंने इस मामले की सबसे अहम बात कही—सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाला NCP गुट प्रशांत किशोर के साथ काम करना चाहता है या नहीं, यह उनका “आंतरिक मामला” है।
बिहार में प्रशांत किशोर की जीत की तारीफ
सुप्रिया सुले ने प्रशांत किशोर के बिहार प्रदर्शन की भी सराहना की। उन्होंने बांकीपुर के नतीजे को एक “बहुत बड़ी लड़ाई” बताया, जिसमें किशोर ने एक मजबूत राजनीतिक मशीनरी के खिलाफ मुकाबला किया।
सुले ने इस बात की ओर भी इशारा किया कि भाजपा अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के मतदाता के रूप में पंजीकृत बूथ पर भी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी।
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में प्रशांत किशोर की सराहना की जानी चाहिए। उनके मुताबिक किशोर मेहनती हैं और वर्षों से कई राजनीतिक दलों के साथ काम कर चुके हैं।
सुप्रिया सुले ने अपने ही राजनीतिक क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर उनकी पार्टी के पास स्थानीय स्तर से लेकर ऊपर तक सत्ता होती और इसके बावजूद बारामती के कटेवाड़ी में उनके अपने बूथ पर खराब प्रदर्शन होता, तो उन्हें लगता कि कहीं न कहीं कुछ गंभीर रूप से गलत है।
बयान में नहीं दिखी कोई राजनीतिक तल्खी
सुप्रिया सुले की प्रतिक्रिया काफी संयमित रही। उन्होंने न तो प्रशांत किशोर की बैठक को लेकर कोई तीखी टिप्पणी की और न ही इसे 2023 में विभाजित हुए NCP के दोनों गुटों के बीच एक बड़े राजनीतिक विवाद के रूप में पेश करने की कोशिश की।
इसके बजाय सुले ने प्रशांत किशोर के साथ अपनी दोस्ती और उनकी पेशेवर स्वतंत्रता पर जोर दिया और यह साफ कर दिया कि दूसरे गुट का उनके साथ काम करने का फैसला उसी गुट का अपना मामला है।
महाराष्ट्र के मौजूदा राजनीतिक माहौल में इस तरह का संयम भी अपने आप में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार की बड़ी भूमिका
इस पूरी बातचीत की पृष्ठभूमि भी काफी महत्वपूर्ण है। जनवरी में एक विमान दुर्घटना में अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार ने पार्टी में अधिक प्रमुख नेतृत्व की भूमिका संभाली।
सुनेत्रा पवार लंबे समय से बारामती में सामाजिक कार्यों से जुड़ी रही हैं और अपेक्षाकृत हाल के वर्षों में ही उन्होंने सक्रिय चुनावी राजनीति में कदम रखा था।
उनके नेतृत्व वाला NCP फिलहाल भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन का हिस्सा है।
राजनीतिक हलकों में यह देखा जा रहा है कि सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में पार्टी किस तरह खुद को मजबूत और संगठित करती है।
कुछ महीने पहले प्रशांत किशोर की पवार परिवार के साथ हुई एक अन्य बैठक ने भी राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दिया था। अब बिहार में उनकी हालिया सफलता के तुरंत बाद हुई यह बैठक अटकलों को और हवा दे रही है कि क्या किशोर भविष्य में पार्टी को रणनीतिक सलाह दे सकते हैं।
हालांकि, NCP के प्रवक्ताओं ने बातचीत को संगठन को मजबूत करने और सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने से जुड़ी आंतरिक चर्चा बताया है।
NCP ने नेतृत्व में बदलाव की खबरों को किया खारिज
सुनेत्रा पवार के गुट से जुड़े पार्टी पदाधिकारियों ने उन रिपोर्टों को खारिज किया है, जिनमें दावा किया गया था कि प्रशांत किशोर ने प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे के कामकाज पर नाराजगी जताई या पार्टी नेतृत्व में बदलाव की मांग की।
पार्टी नेताओं का कहना है कि बैठक में चर्चा व्यावहारिक मुद्दों, संगठन निर्माण और शासन की योजनाओं को बेहतर तरीके से लोगों तक पहुंचाने तक सीमित रही।
हालांकि, महाराष्ट्र जैसे राज्य में जहां गठबंधन के समीकरण और संगठनात्मक ताकत तेजी से बदल सकती है, वहां किसी बड़े राजनीतिक चेहरे और बाहरी रणनीतिकार के बीच बैठक अपने आप में चर्चा का विषय बन जाती है।
पवार परिवार के राजनीतिक और व्यक्तिगत रिश्तों की भी झलक
सुप्रिया सुले की टिप्पणी पवार परिवार और NCP के दोनों गुटों के बीच मौजूद जटिल व्यक्तिगत और राजनीतिक रिश्तों की भी याद दिलाती है।
बारामती लोकसभा सीट लंबे समय से पवार परिवार के भीतर राजनीतिक मुकाबले का केंद्र रही है। सुप्रिया सुले ने इस सीट पर परिवार के दूसरे पक्ष से आने वाली राजनीतिक चुनौतियों का सामना किया है।
इसके बावजूद दोनों पक्ष अलग-अलग मौकों पर यह कहते रहे हैं कि व्यक्तिगत रिश्तों को राजनीतिक संघर्ष से अलग रखा जाना चाहिए।
प्रशांत किशोर को लेकर सुले का गर्मजोशी भरा बयान और साथ ही सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाले गुट के फैसले को उसका “आंतरिक मामला” बताना इसी राजनीतिक और व्यक्तिगत संतुलन को दर्शाता है।
फिलहाल बातचीत तक सीमित है मामला
फिलहाल प्रशांत किशोर और सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाले NCP गुट के बीच हुई बैठक को दोनों पक्ष एक आंतरिक चर्चा के रूप में ही देख रहे हैं।
प्रशांत किशोर जन सुराज के माध्यम से अपनी अलग राजनीतिक राह बनाने में जुटे हुए हैं, जबकि सत्तारूढ़ NCP सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में खुद को स्थिर और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
सुप्रिया सुले की प्रतिक्रिया ने न तो इस मुलाकात को लेकर विवाद को बढ़ाया और न ही इस बातचीत को नजरअंदाज किया। उन्होंने शांत तरीके से इसे दूसरे गुट का “आंतरिक मामला” बताया।
महाराष्ट्र की राजनीति में जहां अक्सर नेताओं के बीच तीखे राजनीतिक हमले देखने को मिलते हैं, वहां सुले का यह संतुलित रुख इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू माना जा सकता है।
अब यह देखना बाकी है कि प्रशांत किशोर और सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाले NCP गुट के बीच हुई यह बातचीत भविष्य में किसी औपचारिक राजनीतिक या रणनीतिक सहयोग का रूप लेती है या फिर यह केवल एक निजी और संगठनात्मक चर्चा तक सीमित रहती है।
फिलहाल इस फैसले का अधिकार सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाले NCP के पास ही है। जैसा कि सुप्रिया सुले ने कहा—यह उनका आंतरिक मामला है।
स्रोत: Times of India, NDTV, The Hindu, News18 और India Today (7–9 अगस्त 2026 की रिपोर्ट्स)।
@रोहित मनराल