जंतर मंतर पर हफ्तों चले छात्र आंदोलन के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा; केंद्र ने प्रदर्शन स्थल खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की

शनिवार को दिल्ली में, एक महीने से अधिक समय तक जंतर मंतर पर डटे छात्रों के आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। और लगभग उसी के तुरंत बाद सरकार ने उस प्रदर्शन स्थल को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी, जो पूरे विवाद का केंद्र बन चुका था।

यह पूरा मामला NEET-UG पेपर लीक और उससे जुड़े कई कथित अनियमितताओं से शुरू हुआ था। अभिजीत दिपके के नेतृत्व में Cockroach Janta Party (CJP) के बैनर तले छात्रों ने जून के मध्य से जंतर मंतर पर लगातार धरना शुरू किया। शुरुआत में कुछ दर्जन छात्र थे, लेकिन धीरे-धीरे यह संख्या हजारों तक पहुंच गई। उन्होंने भीषण गर्मी, पुलिस कार्रवाई और केंद्र सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बावजूद आंदोलन जारी रखा। उनकी सबसे बड़ी और अडिग मांग सिर्फ एक थी—धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना होगा।

शुक्रवार को संविधान क्लब में दूसरी बैठक के बाद सरकार ने छात्रों से एक दिन का और समय मांगा। छात्रों ने कहा कि वे शनिवार दोपहर तक इंतजार करेंगे। लेकिन अनुमान से पहले ही धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना इस्तीफा घोषित कर दिया। उन्होंने कहा कि वे नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ रहे हैं। उन्होंने यह भी लिखा कि वे नहीं चाहते कि इस आंदोलन का इस्तेमाल राष्ट्र-विरोधी ताकतें करें और छात्रों को कानूनी मामलों या लंबे विवादों में उलझकर अपनी पढ़ाई से दूर होना पड़े। प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने उसी दिन उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। कुछ ही घंटों बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया।

अभिजीत दिपके ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए इसे आंदोलन की पहली बड़ी जीत बताया, हालांकि उन्होंने साफ कहा कि आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। बाद में CJP ने घोषणा की कि वे “अच्छी नीयत” के साथ अपना धरना समाप्त कर रहे हैं। इसके अलावा उन्हें कुछ अन्य आश्वासन भी मिले, जिनमें कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने पर विचार और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR की समीक्षा का वादा शामिल है। आंदोलन के समर्थन में अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी अपना अनशन समाप्त कर दिया।

जंतर मंतर पर हफ्तों चले छात्र आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया। जानिए NEET-UG विवाद, CJP आंदोलन, सरकार की कार्रवाई और पूरे घटनाक्रम की पूरी जानकारी।

अब केंद्र सरकार जंतर मंतर को खाली कराने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इस्तीफे की घोषणा के बाद पुलिस की मौजूदगी और बढ़ा दी गई। इससे पहले दिन में हालात तनावपूर्ण होने पर आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए थे। अधिकारियों का उद्देश्य प्रदर्शन स्थल को जल्द से जल्द सामान्य स्थिति में लाना है। कई सप्ताह तक वहां डटे छात्रों के लिए यह ऐसा पल है जब उन्हें लगा कि सरकार आखिरकार झुकी। वहीं सरकार के लिए यह उस राजनीतिक संकट को समाप्त करने की कोशिश है, जो लगातार बढ़ता जा रहा था और दिल्ली से बाहर भी फैलने लगा था।

पिछले कुछ दिनों में जंतर मंतर का माहौल देखने पर साफ महसूस होता था कि यह आंदोलन छात्रों के लिए कितना व्यक्तिगत बन चुका था। बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और कई अन्य राज्यों से आए छात्र—जिनमें से कई अपने परिवार की पहली पीढ़ी के उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले थे—बताते थे कि उनके माता-पिता ने मेडिकल प्रवेश की तैयारी के लिए वर्षों की कमाई खर्च की है। उनका कहना था कि एक पेपर लीक उनकी कई सालों की मेहनत को बर्बाद कर सकता है। “Cockroach” नाम, जो शुरुआत में एक अपमानजनक शब्द के रूप में इस्तेमाल किया गया था, बाद में आंदोलनकारियों ने उसे अपनी पहचान बना लिया।

सरकार की ओर से स्थिति को संभालने की लगातार कोशिश की गई। कई दौर की बातचीत हुई, कुछ रियायतें भी प्रस्तावित की गईं, लेकिन छात्रों की सबसे बड़ी मांग—धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा—कभी नहीं बदली। प्रधान के इस्तीफे और शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार प्रह्लाद जोशी को सौंपना सरकार की ओर से पूरे मुद्दे पर नई शुरुआत करने की कोशिश माना जा रहा है। जोशी संगठनात्मक अनुभव रखने वाले वरिष्ठ नेता हैं। हालांकि परीक्षा प्रणाली में तेजी से सुधार हो पाएंगे या नहीं, इस पर सभी की नजर बनी रहेगी।

आखिरकार 25 जुलाई की घटना को ऐसे पल के रूप में देखा जा रहा है, जब सड़क पर चल रहे लंबे छात्र आंदोलन ने एक केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे तक का रास्ता तैयार कर दिया। अब छात्र अपने टेंट समेट रहे हैं, जंतर मंतर धीरे-धीरे सामान्य प्रदर्शन स्थल में बदल जाएगा, लेकिन शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर उठे सवाल प्रदर्शन खत्म होने के साथ समाप्त नहीं होंगे।

स्रोत: The Hindu, BBC News, Al Jazeera, NDTV, Hindustan Times, Indian Express, NPR, 25 जुलाई 2026 की रिपोर्ट्स।

@रोहित मनराल

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top