धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बिना ही सोनम वांगचुक ने 26 दिन का अनशन क्यों खत्म किया? खुद बताई वजह

जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने आखिरकार अपना 26 दिनों का भूख हड़ताल (अनशन) समाप्त कर दिया। उन्होंने गुरुवार देर रात, 23 जुलाई 2026 को गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल के बिस्तर पर लेटे हुए अपना अनशन तोड़ा। इस दौरान केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह, साथ ही लेह एपेक्स बॉडी के नेता भी मौजूद थे। कई हफ्तों तक पूरा देश उन्हें दिन-ब-दिन कमजोर होते हुए देखता रहा। डॉक्टरों ने उनकी किडनी को लेकर गंभीर चेतावनी दी थी। समर्थक लगातार कह रहे थे कि उनकी जिंदगी किसी भी एक मांग से ज्यादा महत्वपूर्ण है। फिर भी एक सवाल बार-बार उठ रहा था—शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं हुआ, फिर भी वांगचुक ने अनशन क्यों खत्म कर दिया?

सोनम वांगचुक ने 26 दिन का अनशन क्यों समाप्त किया? जानिए धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, छात्रों को मिली लिखित गारंटी और सरकार के तीन बड़े आश्वासनों की पूरी कहानी।

वांगचुक ने इस तथ्य को छिपाया नहीं। अनशन समाप्त करने के अगले दिन जारी किए गए एक वीडियो में उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि नेताओं ने उन्हें “यह आश्वासन नहीं दिया कि यह कब होगा।” वे काफी थके हुए दिख रहे थे, उनकी आवाज भी धीमी थी, लेकिन उनकी बात बिल्कुल स्पष्ट और शांत थी। उन्होंने कहा, “मेरा दिमाग अलग तरीके से काम करता है। अगर वह इस्तीफा नहीं देते हैं तो इससे बच्चों या हमारा नुकसान नहीं होगा, बल्कि सरकार का ही नुकसान होगा। उन्हें इस्तीफा देना चाहिए था। अगर वे पहले ही इस्तीफा दे देते तो इतना नुकसान नहीं होता। लेकिन मेरे लिए यह सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा नहीं था। यह अपने आप सुलझ जाएगा।”

उन्होंने बताया कि उनके लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता आंदोलन में शामिल छात्रों की सुरक्षा थी। उन्होंने देखा था कि लद्दाख में कई युवा वर्षों तक एफआईआर के मामलों में उलझे रहे, जिससे उनका भविष्य बर्बाद हो गया। वे नहीं चाहते थे कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्र या 20 जुलाई को आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च में शामिल युवाओं के साथ भी ऐसा ही हो।

सरकार ने उन्हें तीन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर लिखित आश्वासन दिया।

पहला, जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और युवाओं तथा 20 जुलाई के मार्च में शामिल लोगों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई या एफआईआर नहीं की जाएगी।

दूसरा, पेपर लीक संकट से जुड़े मामलों में आत्महत्या करने वाले 20 से अधिक छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाएगा।

तीसरा, परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही सुनिश्चित करने और भविष्य में ऐसी विफलताओं को रोकने के लिए संसद में विस्तृत चर्चा और बहस कराई जाएगी।

वांगचुक ने कहा कि यही तीन आश्वासन उनके लिए अनशन समाप्त करने के लिए पर्याप्त थे। उन्होंने 28 जून को जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन में शामिल होकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। उनका उद्देश्य छात्रों की मांगों का समर्थन करना, प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार हो रहे पेपर लीक के खिलाफ जवाबदेही तय कराना और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाना था।

करीब 18 जुलाई को जब पुलिस उन्हें अस्पताल लेकर गई, तब तक उनका शरीर गंभीर रूप से कमजोर हो चुका था। इसके बावजूद उन्होंने अनशन जारी रखा। इस दौरान विभिन्न दलों के लगभग 65 सांसदों ने या तो उनसे मुलाकात की या पत्र लिखकर उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की। हजारों आम लोगों ने भी उन्हें संदेश भेजकर कहा कि आंदोलन को उनकी जरूरत है, इसलिए उन्हें जीवित रहना चाहिए।

उन्होंने हिंसा की आशंका का भी उल्लेख किया। अनशन समाप्त करने के बाद अपने पहले बयान में उन्होंने लिखा कि यह फैसला “विभिन्न शर्तों पर लंबी बातचीत और देश में संभावित हिंसा की आशंका को देखते हुए” लिया गया। उन्होंने सभी से सतर्क और शांतिपूर्ण रहने की अपील की। उन्होंने पहले भी कहा था, “शांति और केवल शांति ही मेरा रास्ता है।” जंतर-मंतर का प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन उन्हें यह चिंता थी कि कहीं अन्य जगहों पर असामाजिक तत्व माहौल खराब करने की कोशिश न करें।

सीजेपी की मूल मांगों की सूची इससे कहीं लंबी थी। इसमें धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, आत्महत्या करने वाले प्रत्येक छात्र के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा, सभी अनावश्यक एफआईआर वापस लेना और कथित पुलिस ज्यादतियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई जैसी मांगें शामिल थीं।

वांगचुक ने स्पष्ट किया कि इस्तीफे की मांग आंदोलन से हटाई नहीं गई है। उन्होंने केवल यह फैसला किया कि अब यह वह मुद्दा नहीं है जिसके लिए वे अपनी जान दांव पर लगाएं। उन्होंने कहा, “मुझे यह भी नहीं लगता कि हम इस मांग को हासिल नहीं कर पाए हैं।” उनके अनुसार, इस्तीफा न देने की राजनीतिक कीमत अंततः सरकार को ही चुकानी पड़ेगी।

उनके अनशन समाप्त होने के बाद भी जंतर-मंतर का प्रदर्शन खत्म नहीं हुआ। छात्र और सीजेपी के स्वयंसेवक वहीं डटे रहे और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार तथा जवाबदेही की मांग जारी रखी। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने पहले छात्रों के अनुशासन की सराहना करते हुए कहा था कि वे एक-दूसरे के साथ भोजन साझा कर रहे थे, प्रदर्शन स्थल की सफाई कर रहे थे, अनजान लोगों की मदद कर रहे थे और दबाव के बीच भी राष्ट्रगान गा रहे थे। उन्होंने इन युवाओं को आदर्श बताया।

अनशन समाप्त करने के बाद वांगचुक का संदेश भी इसी भावना के अनुरूप था—आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखें, छात्रों पर ध्यान केंद्रित रखें और किसी भी युवा का भविष्य गुस्से में दर्ज किए गए मामलों की वजह से बर्बाद न होने दें।

इस पूरे घटनाक्रम को देखने वाले कई लोगों के लिए उनका फैसला व्यावहारिक भी लगा और सिद्धांतों पर आधारित भी। दस किलोग्राम से अधिक वजन कम हो जाने और किडनी पर गंभीर असर पड़ने के बावजूद उन्होंने जीवित रहने का फैसला किया ताकि वे अपनी लड़ाई आगे भी जारी रख सकें। उन्होंने सरकार के तीन ठोस लिखित आश्वासनों को स्वीकार किया और इस्तीफे के मुद्दे को भविष्य के लिए छोड़ दिया। उन्हें विश्वास था कि जनता का दबाव और संसद में होने वाली बहस इस विषय को आगे बढ़ाती रहेगी।

आने वाले हफ्तों और महीनों में यह स्पष्ट होगा कि परीक्षा प्रणाली की विफलताओं पर संसद में वास्तव में कितनी गंभीर चर्चा होती है और सरकार मुआवजे तथा एफआईआर वापस लेने के अपने वादों को किस तरह पूरा करती है।

सोनम वांगचुक ने अनशन क्यों खत्म किया

वांगचुक के अपने शब्द ही सबसे स्पष्ट रूप से बताते हैं कि उनका अनशन आखिर क्यों समाप्त हुआ। उन्होंने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरने वाली एक मांग की बजाय छात्रों की सुरक्षा और शांतिपूर्ण संघर्ष को प्राथमिकता दी। जैसा कि उन्होंने स्वयं कहा, “मेरा दिमाग अलग तरीके से काम करता है।” धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सरकार को भविष्य में राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। लेकिन फिलहाल छात्रों को लिखित सुरक्षा का आश्वासन मिला है और उनकी समस्याओं पर संसद में चर्चा का रास्ता खुला है। वांगचुक ने यही पर्याप्त समझा और 26 दिनों के बाद एक गिलास जूस पीकर अपना अनशन समाप्त कर दिया।

स्रोत:

  • LiveMint – “Sonam Wangchuk on govt’s three assurances…” (24 जुलाई 2026)
  • The Hindu – “Sonam Wangchuk has broken his fast…” (24 जुलाई 2026)
  • Al Jazeera / Daily Sun – अनशन समाप्त होने संबंधी रिपोर्ट (24 जुलाई 2026)
  • सोनम वांगचुक का वीडियो बयान और X पोस्ट (23–24 जुलाई 2026)
  • NDTV तथा अन्य समकालीन मीडिया रिपोर्ट्स

@रोहित मनराल

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