सोनम वांगचुक का 17वें दिन भी अनशन जारी: NEET UG 2026 पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन हुआ और तेज, छात्रों ने मांगा न्याय

इस साल लाखों छात्रों का डॉक्टर बनने का सपना NEET UG 2026 पेपर लीक विवाद की वजह से टूट गया। इसी मुद्दे पर देश के जाने-माने शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 17 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनकी बिगड़ती सेहत को लेकर लोगों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

सोनम वांगचुक वही शख्स हैं जिन्हें लद्दाख में शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पूरे देश में सम्मान मिलता है। आइस स्तूप (Ice Stupa) जैसे नवाचारों से लेकर लद्दाख के भविष्य के लिए उनकी आवाज हमेशा मजबूत रही है। इस बार उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janta Party) के युवा कार्यकर्ताओं के साथ दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे NEET-UG 2026 विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया है।

सोनम वांगचुक 17वें दिन भी NEET UG 2026 पेपर लीक के विरोध में भूख हड़ताल पर हैं। जानिए उनकी मांगें, छात्रों का आंदोलन और ताजा अपडेट।

प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि NEET UG 2026 परीक्षा में पेपर लीक, नकल और अन्य गड़बड़ियों ने 20 लाख से अधिक छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया। डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले कई छात्र मानसिक तनाव में चले गए और कुछ छात्रों द्वारा आत्महत्या किए जाने की खबरों ने पूरे देश को झकझोर दिया।

सोनम वांगचुक ने 28 जून से अपना अनशन शुरू किया था। उन्होंने घोषणा की थी कि वह केवल पानी और थोड़ा-सा नमक लेकर ही अनशन जारी रखेंगे। दो सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद उनकी सेहत काफी कमजोर हो गई है। उनके करीबी लोगों के अनुसार उनका वजन 8 किलो से अधिक कम हो चुका है, उनका ब्लड प्रेशर भी कम है और वह बेहद कमजोर दिखाई दे रहे हैं।

हालांकि जब उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की जाती है, तो उनका जवाब होता है, “मैं बाहर से कमजोर हूं, लेकिन अंदर से मजबूत हूं।” यह शब्द उनके अटूट संकल्प और हौसले को दिखाते हैं।

उनकी मांगें साफ और सीधी हैं। उनका कहना है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस पूरे मामले की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए। जिन परिवारों ने इस संकट में अपने बच्चों को खोया या गंभीर नुकसान झेला है, उन्हें उचित सहायता मिलनी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण मांग यह है कि देश की परीक्षा प्रणाली में स्थायी और पारदर्शी सुधार किए जाएं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।

वांगचुक का कहना है कि उन्होंने यह कदम केवल सुर्खियां बटोरने के लिए नहीं उठाया। उन्होंने पहले सरकार से जवाब और कार्रवाई का इंतजार किया, लेकिन जब कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिली, तब उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने का फैसला लिया।

इस बीच अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी नेताओं ने उनके आंदोलन का समर्थन किया है। साथ ही उन्होंने वांगचुक से स्वास्थ्य को देखते हुए अनशन समाप्त करने की भी अपील की है। हालांकि वांगचुक फिलहाल अपने निर्णय पर अडिग हैं।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर इन दिनों छात्रों, युवाओं और आम नागरिकों की लगातार भीड़ पहुंच रही है। कई लोग प्रतीकात्मक रूप से उनके समर्थन में उपवास भी रख रहे हैं। प्रदर्शन स्थल पर गुस्सा तो है ही, लेकिन साथ ही इस उम्मीद का माहौल भी है कि शायद इस बार सरकार उनकी बात सुनेगी।

एक स्वयंसेवक ने दावा किया कि तेज धूप से बचाने के लिए जो छाया (शेड) लगाई गई थी, उसे हटाने के लिए पुलिस ने कहा। इस घटना के बाद प्रदर्शनकारियों में नाराजगी और बढ़ गई। यदि जल्द कोई समाधान नहीं निकलता है, तो 20 जुलाई के आसपास संसद तक बड़े मार्च की भी तैयारी की जा रही है।

भारत में प्रतियोगी परीक्षाएं केवल एक परीक्षा नहीं होतीं, बल्कि लाखों युवाओं के करियर, परिवार की उम्मीदों और पूरे भविष्य का फैसला करती हैं। ऐसे में जब परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठते हैं, तो छात्रों और अभिभावकों का भरोसा पूरी तरह टूट जाता है। माता-पिता अपनी वर्षों की कमाई कोचिंग पर खर्च करते हैं, छात्र दिन-रात मेहनत करते हैं और यदि पेपर लीक या किसी घोटाले की वजह से उनका भविष्य प्रभावित होता है, तो यह उनके साथ बड़ा अन्याय माना जाता है।

सोनम वांगचुक हमेशा से केवल बातें करने के बजाय जमीन पर बदलाव लाने के लिए जाने जाते हैं। चाहे लद्दाख के पर्यावरण की रक्षा का मुद्दा हो या दूरदराज के इलाकों में बेहतर शिक्षा की पहल, उन्होंने हमेशा सक्रिय भूमिका निभाई है। यही कारण है कि जब वह किसी मुद्दे पर आवाज उठाते हैं तो देशभर के लोग उसे गंभीरता से सुनते हैं।

सोनम वांगचुक भूख हड़ताल NEET UG 2026

फिलहाल सबसे बड़ी चिंता उनकी सेहत को लेकर है। डॉक्टर और उनके सहयोगी लगातार उनके स्वास्थ्य पर नजर रखे हुए हैं और सभी यही उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी स्थिति ज्यादा गंभीर न हो। वहीं आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि उनका संकल्प पहले से भी ज्यादा मजबूत है।

भारत में भूख हड़ताल लंबे समय से लोकतांत्रिक विरोध का एक महत्वपूर्ण माध्यम रही है। जब बाकी रास्ते बंद हो जाते हैं, तब लोग इस तरीके से अपनी आवाज बुलंद करते हैं। लेकिन एक 59 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता को दिन-ब-दिन कमजोर होते देखना हर किसी के लिए चिंता की बात है।

अब तक सरकार की ओर से ऐसा कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है जिससे प्रदर्शनकारी संतुष्ट नजर आएं। यही चुप्पी आंदोलनकारियों के बीच सबसे बड़ी नाराजगी का कारण बन रही है।

यह मुद्दा केवल एक व्यक्ति या एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। यह देश के लाखों युवाओं के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और न्याय की मांग से जुड़ा हुआ है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब समय आ गया है कि प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रभावित छात्रों के लिए उचित सहायता जैसे ठोस सुधार लागू किए जाएं।

फिलहाल पूरे देश की नजरें सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य और इस आंदोलन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। सभी यही उम्मीद कर रहे हैं कि छात्रों को न्याय मिले और भविष्य में किसी भी मेहनती छात्र का सपना इस तरह की अनियमितताओं की वजह से न टूटे।

स्रोत: Al Jazeera, Reuters, BBC, DW, Hindustan Times, India Today तथा जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े आयोजकों द्वारा 14–15 जुलाई 2026 तक साझा की गई जानकारी।

@रोहित मनराल

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