‘देशभर में खुले आपातकाल जैसी स्थिति’, CJP का आरोप; CEC के इस्तीफे तक जारी रहेगा विरोध प्रदर्शन

CJP विरोध प्रदर्शन

नई दिल्ली: हिरासत से रिहा होने के कुछ ही घंटों बाद, रविवार को Cockroach Janta Party (CJP) के नेता प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में पत्रकारों के सामने आए और उसी अंदाज में अपनी बात रखी, जिस तरह गुस्से और थकान से भरे लोग अपनी बात कहते हैं।

सौरव दास ने पत्रकारों की ओर देखते हुए कहा कि इस समय पूरा देश एक खुले आपातकाल जैसी स्थिति से गुजर रहा है। उन्होंने इसकी तुलना 1975 में लगे आपातकाल से की। उन्होंने कहा, “दिल्ली को छावनी में बदल दिया गया है।” उनके मुताबिक, शहर में 30 से 40 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात हैं, 57 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए हैं, राजधानी ट्रेनें रद्द की गई हैं और रविवार को बाजार भी जबरन बंद कराए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आम लोगों को परेशान किया जा रहा है, ताकि वे सरकार के बजाय प्रदर्शनकारियों को दोष देने लगें।

दास ने कहा कि मोदी सरकार ने राज्य को अपने ही नागरिकों के खिलाफ खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती तो बातचीत के लिए हममें से कुछ लोगों को बुला सकती थी, लेकिन इसके बजाय पूरी राजधानी को बंद करने जैसा माहौल बना दिया गया।

CJP की मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision यानी SIR) में कई समस्याएं हैं और लोगों के मतदान करने के अधिकार पर ही खतरा मंडरा रहा है। वहीं, चुनाव आयोग इन आरोपों को खारिज करता है।

दास, आशुतोष रांका और पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके को शनिवार को दिल्ली पहुंचते ही हिरासत में ले लिया गया था। रविवार को एक मजिस्ट्रेट ने उन्हें रिहा कर दिया। इसके लिए तीनों को 50-50 हजार रुपये की जमानती राशि जमा करनी पड़ी और एक साल तक “शांति भंग नहीं करने” की शर्त पर सहमति देनी पड़ी।

इस शर्त पर प्रतिक्रिया देते हुए दास ने लगभग हंसते हुए कहा, “वे कहते हैं कि हमें एक साल तक शांति भंग नहीं करनी चाहिए। शांति भंग करने वाले लोग नरेंद्र मोदी, अमित शाह और ज्ञानेश कुमार हैं।”

रांका ने साफ शब्दों में कहा, “जब तक कुमार इस्तीफा नहीं देते, यह विरोध प्रदर्शन नहीं रुकेगा।” उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर एक निर्धारित विरोध प्रदर्शन स्थल है और वहां शांतिपूर्ण प्रदर्शन को शांति भंग करने की कार्रवाई नहीं कहा जा सकता। दास ने भी कहा, “विरोध प्रदर्शन होंगे, सिर्फ दिल्ली में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में।”

शनिवार का दिन काफी तनावपूर्ण रहा। पुलिस के मुताबिक, लगभग 2,500 लोगों को हिरासत में लिया गया था, जबकि अन्य जगहों पर सामने आए आंकड़े करीब 7,000 तक बताए जा रहे हैं। मध्य दिल्ली को सील कर दिया गया। कुछ इलाकों में मोबाइल नेटवर्क बंद कर दिए गए। कश्मीर, बंगाल और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से भी सुरक्षा बलों को बुलाया गया। CJP का आरोप है कि हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं के फोन उचित दस्तावेजों के बिना ले लिए गए और उन्हें आशंका है कि इन फोन से छेड़छाड़ की गई हो सकती है। पार्टी के मुताबिक, विरोध प्रदर्शन को कवर कर रहे पत्रकारों को भी परेशान किया गया।

विपक्षी नेताओं ने भी इसी तरह की चिंता जताई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे अघोषित आपातकाल बताया। उन्होंने और राहुल गांधी ने भारत के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात करने की योजना बनाई है। गांधी ने कहा कि सरकार जितना अधिक Gen Z यानी युवा पीढ़ी को दबाने की कोशिश करेगी, युवाओं का गुस्सा उतना ही बढ़ेगा।

पुलिस लगातार कह रही है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी कदम नियमों के अनुसार उठाए गए हैं। आगे भी विरोध प्रदर्शन होने की आशंका के चलते भारी सुरक्षा तैनाती जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को अवैध रूप से हिरासत में नहीं रखा जाना चाहिए और मेट्रो तथा ट्रेनों का संचालन सामान्य रूप से होना चाहिए।

CJP की शुरुआत Gen Z की उस प्रतिक्रिया के रूप में हुई थी, जो बेरोजगार युवाओं और कॉकरोच को लेकर अदालत में की गई एक टिप्पणी के बाद सामने आई। यह कोई पंजीकृत राजनीतिक पार्टी नहीं है। इसके सदस्य लगातार एक ही मांग दोहरा रहे हैं कि मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त के रहते स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं हैं। उनका कहना है कि ज्ञानेश कुमार को पद छोड़ना चाहिए और SIR की प्रक्रिया में सुधार किया जाना चाहिए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP नेताओं ने स्पष्ट किया कि उन्होंने ऐसा कोई बॉन्ड नहीं भरा है, जो उन्हें दोबारा सड़कों पर उतरने से रोकता हो। उनका विरोध प्रदर्शन जारी है और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे तक नहीं रुकेगा। उनका कहना है कि इस समय देश ऐसी स्थिति से गुजर रहा है, जो एक खुले आपातकाल जैसी दिखाई देती है और महसूस होती है।

स्रोत: इकोनॉमिक टाइम्स, News9live, BBC, न्यू इंडियन एक्सप्रेस, इंडियन एक्सप्रेस, हिंदुस्तान टाइम्स, फ्री प्रेस जर्नल, डेक्कन क्रॉनिकल और PTI।

@रोहित मनराल

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