
नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर गरमा गया है और INDIA Bloc इस मुद्दे को लेकर पीछे हटने के मूड में नहीं है। मंगलवार को Parliament Street और चुनाव आयोग के मुख्यालय के पास हुए धरने के बाद अब विपक्ष ने अगले चरण के प्रदर्शन की तैयारी शुरू कर दी है। कांग्रेस ने 8 अक्टूबर को देशभर में विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है, जबकि INDIA Bloc का “Save Democracy” कार्यक्रम भी इसी तारीख तक जारी रहेगा। जिला स्तर पर मार्च और प्रदर्शन किए जाने की तैयारी है और सांसदों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर दबाव बनाए रखने की कोशिश जारी रहने की उम्मीद है।
यह पूरा विवाद पिछले महीने सामने आई Indian Express की एक जांच रिपोर्ट के बाद और तेज हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 बार अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इनमें मतदाताओं को जोड़ने और हटाने, Form 6 में बदलाव और वोटर डेटाबेस को संभालने के तरीके से जुड़े मुद्दे शामिल थे। विपक्ष ने इन मुद्दों को लेकर Special Intensive Revision (SIR) को “vote chori” का एक जरिया बताया है।
विपक्ष की मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें, SIR को वापस लिया जाए, हटाए गए वास्तविक मतदाताओं के नाम फिर से जोड़े जाएं और कुछ विपक्षी दल भविष्य के चुनावों में EVM की जगह बैलेट पेपर की वापसी की मांग भी कर रहे हैं।
30 सितंबर को 19 दलों के नेताओं ने तीन घंटे से ज्यादा समय तक बैठक की थी, जिसके बाद प्रदर्शन की रणनीति तय की गई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने घोषणा की थी कि 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक हर जिले में “Save Democracy” मार्च निकाले जाएंगे। दोनों सदनों के सांसदों को 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च करना था। इसके अलावा राष्ट्रपति से मिलने और 2023 के उस कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मामले दाखिल करने पर भी चर्चा हुई, जिसके तहत CEC और अन्य चुनाव आयुक्तों को कुछ कानूनी सुरक्षा मिलती है।
मंगलवार को इस अभियान का पहला बड़ा सड़क प्रदर्शन देखने को मिला। राहुल गांधी के नेतृत्व में कुछ सौ विपक्षी सांसद संसद से निर्वाचन सदन की ओर मार्च करने निकले। अखिलेश यादव, अभिषेक बनर्जी, सुप्रिया सुले, संजय राउत और कई अन्य नेता भी उनके साथ थे। Parliament Street पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोक दिया।
इसके बाद माहौल काफी गर्म हो गया। प्रदर्शन के दौरान “Vote chor, gaddi chhod” और “Democracy not for sale” जैसे नारे लगाए गए। कुछ नेताओं ने बैरिकेड्स पर चढ़कर विरोध जताया। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “Gyanesh, it’s done bro. Time to resign.”
कांग्रेस सांसदों का एक समूह, जिसमें प्रियंका गांधी वाड्रा भी शामिल थीं, पास के आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंच गया और वहां कई घंटों तक बैठा रहा। शाम तक पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कई अन्य नेताओं को हिरासत में लिया। हालांकि, बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।
बुधवार को भी विरोध प्रदर्शन जारी रहा। नेताओं ने दोपहर के भोजन के दौरान बैठक की और इसके बाद बसों से जंतर-मंतर की ओर जाने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें फिर रोक दिया और कुछ नेताओं को हिरासत में लिया गया।
राहुल गांधी ने साफ किया कि जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा, “This is a fight to protect the most sacred thing in this country.” राहुल गांधी ने यह भी कहा कि “There is nothing that Narendra Modi and Amit Shah can do that will stop us.”
अब कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने राज्य इकाइयों को पत्र लिखकर 8 अक्टूबर को राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शन आयोजित करने को कहा है। विपक्ष ने 7 अक्टूबर को हुई हिरासत की घटनाओं के बाद इसे “Black Day for Indian Democracy” भी बताया है। वहीं, पहले से तय जिला स्तरीय मार्च भी 8 अक्टूबर तक जारी रहने हैं। ऐसे में देशभर में स्थानीय स्तर पर INDIA Bloc के और प्रदर्शन देखने को मिल सकते हैं।
दूसरी ओर, BJP ने विपक्ष के आरोपों का जोरदार तरीके से विरोध किया है। BJP नेताओं का कहना है कि विपक्ष चुनावी हार के बाद निराशा में इस तरह के आरोप लगा रहा है। उनका कहना है कि विपक्ष के दावे बेबुनियाद हैं और चुनाव आयोग मतदाता सूची को साफ और व्यवस्थित करने का अपना काम कर रहा है।
चुनाव आयोग ने भी लगातार कहा है कि फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं और वर्षों से पूर्ण संशोधन नहीं होने के कारण SIR एक जरूरी प्रक्रिया है। आयोग की ओर से यह भी कहा गया है कि 6 अक्टूबर के मार्च से पहले विपक्ष की ओर से कोई औपचारिक बैठक का अनुरोध नहीं मिला था।
इस पूरे विवाद में INDIA Bloc के बाहर की कुछ पार्टियां भी विपक्ष के साथ दिखाई दी हैं। BJD के सांसद प्रदर्शनकारियों के साथ मार्च करते नजर आए। उन्होंने कहा कि उनके नेता नवीन पटनायक ने उन्हें इसमें शामिल होने का निर्देश दिया था, क्योंकि ओडिशा में मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर चिंता है। AAP भी कुछ प्रदर्शनों में दिखाई दी है।
इस तरह विपक्ष इस मुद्दे पर एक व्यापक राजनीतिक मोर्चा दिखाने की कोशिश कर रहा है, भले ही दूसरे राजनीतिक मुद्दों पर इन दलों के बीच हमेशा एक जैसी राय नहीं रहती।
फिलहाल विपक्ष की मुख्य मांगें वही हैं। ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, SIR को वापस लेना, सूची से हटाए गए वास्तविक मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़ना और भविष्य के चुनावों में बैलेट पेपर की वापसी की मांग इनमें शामिल है। विपक्ष राष्ट्रपति से मिलने और अदालतों में कानूनी लड़ाई आगे बढ़ाने की भी तैयारी कर रहा है। अक्टूबर और नवंबर में पांच बड़े रैलियों की योजना भी बताई गई है, जिसमें 1 नवंबर को दिल्ली में होने वाली रैली शामिल है।
आम लोगों के लिए इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल मतदाता सूची की पारदर्शिता और विश्वसनीयता से जुड़ा है। अगर मतदाता सूची साफ और पारदर्शी नहीं है, तो पूरी चुनावी प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।
विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं और मतदाता सूचियों में हेरफेर हो रहा है। वहीं, सरकार और चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची का संशोधन जरूरी है और विपक्ष चुनावी नतीजों से नाराज होकर राजनीतिक मुद्दा खड़ा कर रहा है।
अब 8 अक्टूबर के प्रदर्शन से यह पता चलेगा कि इस अभियान में अभी कितनी राजनीतिक ताकत बाकी है। कांग्रेस की राज्य इकाइयों और स्थानीय संगठनों को हर स्तर पर सड़कों पर उतरने के निर्देश दिए गए हैं। दिल्ली में मंगलवार और बुधवार की हिरासत की घटनाओं के बाद विपक्ष की अगली रणनीति को लेकर भी चर्चा तेज है।
INDIA Bloc लगातार कह रहा है कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि चुनावी संस्था की विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर है। वहीं, सरकार और चुनाव आयोग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष है और विपक्ष के प्रदर्शन केवल राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश हैं।
8 अक्टूबर को जो कुछ भी होता है, उससे साफ है कि यह विवाद अभी खत्म होने वाला नहीं है। मंगलवार और बुधवार को सड़कों पर उतरे सांसदों ने संकेत दे दिया है कि वे आगे भी प्रदर्शन जारी रखेंगे। जिला स्तर के कार्यक्रम भी चल रहे हैं और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी शांत होती नहीं दिख रही है।
चुनाव आयोग एक बार फिर भारतीय राजनीति के केंद्र में है और INDIA Bloc तथा सरकार के बीच यह टकराव आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है।
Sources: Indian Express, The Hindu, Hindustan Times, The Print, Times of India, NDTV Profit, Outlook India, Frontline, The Diplomat, ANI reports.
@रोहित मनराल